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सचेतन- 38 –आत्मबोध – साधना से साक्षात्कार की ओर 

“ध्यान कोई तकनीक नहीं, एक परिपक्व स्थिति है” क्या आपने कभी यह महसूस किया है किआप ध्यान करना चाहते हैं,लेकिन मन बैठने को तैयार ही नहीं होता? शरीर बैठ जाता है,आँखें बंद हो जाती हैं,पर मन बाहर ही भटकता रहता है। आत्मबोध में आज का यह विचारहमें एक बहुत स्पष्ट बात सिखाता है— 👉 ध्यान […]

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सचेतन- 6: निदिध्यासन – आत्मा का साक्षात्कार

स्वामी विवेकानंद कहते थे — “जब विचारों का शुद्धिकरण हो जाता है, तब मन सत्य में स्थित होता है। तब ज्ञाता और ज्ञेय के बीच भेद मिट जाता है। यही है निदिध्यासन — आत्मा के स्वरूप में स्थित हो जाना।” निष्कर्ष निदिध्यासन आत्म-चिंतन की वह पराकाष्ठा है, जहाँ ‘जानना’ और ‘हो जाना’ एक हो जाता […]

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सचेतन- 5: सत्य पर गहन ध्यान

निदिध्यासन (Nididhyasanam) – “ध्यान और आत्मसात” सुने और समझे हुए ज्ञान को ध्यानपूर्वक आत्मसात करना, अर्थात उस ज्ञान को अपने जीवन और चेतना में पूरी तरह उतारना। निदिध्यासन (Nididhyasana) – सत्य पर गहन ध्यान निदिध्यासन का अर्थ है — किसी सत्य, विचार, मंत्र या उपदेश पर बार-बार, एकाग्र होकर ध्यान करना। यह केवल सोचने भर […]

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सचेतन- 2: सुनने मात्र से चेतना की जागृति का मार्ग

चेतना को जानने के तीन मार्ग 1. श्रवण (Shravanam) – “सुनना और ग्रहण करना” परिभाषा: श्रवण का अर्थ है – गुरु या आचार्य से वेद, उपनिषद, भगवद्गीता जैसे शास्त्रों का ज्ञान श्रद्धा और ध्यानपूर्वक सुनना। महत्व: कैसे करें: कहानी: अर्जुन का श्रवण – समर्पण से ज्ञान की ओर कुरुक्षेत्र का मैदान युद्ध के लिए तैयार […]