प्रज्ञा केवल ज्ञान नहीं, बल्कि आत्मिक अनुभव है — प्रज्ञा: ज्ञान से आगे, अनुभव की ओर ले जाता है। प्रज्ञा का अर्थ केवल पढ़ा-पढ़ाया हुआ ज्ञान नहीं है।यह वह गूढ़ बुद्धि है जो तब जागती है जब हम ज्ञान को आत्मा में जीते हैं,जब सत्य केवल समझा नहीं जाता — अनुभव किया जाता है।और यह […]
Tag: मनन
सचेतन- 2: सुनने मात्र से चेतना की जागृति का मार्ग
चेतना को जानने के तीन मार्ग 1. श्रवण (Shravanam) – “सुनना और ग्रहण करना” परिभाषा: श्रवण का अर्थ है – गुरु या आचार्य से वेद, उपनिषद, भगवद्गीता जैसे शास्त्रों का ज्ञान श्रद्धा और ध्यानपूर्वक सुनना। महत्व: कैसे करें: कहानी: अर्जुन का श्रवण – समर्पण से ज्ञान की ओर कुरुक्षेत्र का मैदान युद्ध के लिए तैयार […]
