सुगमता

सचेतन 2.1: रामायण कथा: सुन्दरकाण्ड - सर्वार्थसिद्धि की प्राप्ति

सार

रामायण — आदिकवि वाल्मीकि का आदिकाव्य, राम की जीवन-यात्रा के सात काण्ड। इनमें सुन्दरकाण्ड सबसे विशेष है: यह हनुमान जी की सफलता का काण्ड है, जिसके पाठ से सर्वार्थसिद्धि — सभी प्रयोजनों की सिद्धि मानी जाती है। आज से इस यात्रा का आरंभ।

Read in English

The Ramayana, composed by the first poet Valmiki, traces Lord Rama's life-journey through seven kandas. Among them the Sundarkand stands apart: it is the chapter of Hanuman's triumph, and its recitation is traditionally held to grant sarvartha-siddhi — the fulfillment of all noble aims. This episode opens the Sachetan journey through the Sundarkand.

सचेतन 2.1: रामायण कथा: सुन्दरकाण्ड - सर्वार्थसिद्धि की प्राप्ति

राम की जीवन-यात्रा के सात काण्ड- बालकाण्ड, अयोध्यकाण्ड, अरण्यकाण्ड, सुन्दरकाण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, लङ्काकाण्ड और उत्तरकाण्ड।

रामायण आदिकाव्य में 'राम की जीवन-यात्रा है। इसके रचयिता महर्षि वाल्मीकि को 'आदिकवि' कहा जाता है। संस्कृत साहित्य परम्परा में रामायण और महाभारत को इतिहास कहा गया है और दोनों सनातन संस्कृति के सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय ग्रन्थ हैं। रामायण के सात अध्याय हैं जो काण्ड के नाम से जाने जाते हैं। इसमें कुल लगभग २४,००० श्लोक हैं। 

मान्यतानुसार रामायण का समय त्रेतायुग का माना जाता है। श्रीराम अवतार श्वेतवाराह कल्प के सातवें वैवस्वत मन्वन्तर के चौबीसवें त्रेता युग में हुआ था जिसके अनुसार श्रीरामचंद्र जी का काल लगभग पौने दो करोड़ वर्ष पूर्व का है। इसके सन्दर्भ में विचार पीयूष, भुशुण्डि रामायण, पद्मपुराण, हरिवंश पुराण, वायु पुराण, संजीवनी रामायण एवं पुराणों से प्रमाण दिया जाता है।

हिन्दू शास्त्रों के अनुसार भगवान राम, विष्णु के मानव अवतार थे। इस अवतार का उद्देश्य मृत्युलोक में मानवजाति को आदर्श जीवन के लिये मार्गदर्शन देना था। अन्ततः श्रीराम ने राक्षसों के राजा रावण का वध किया और धर्म की पुनर्स्थापना की।

रामायण में सात काण्ड हैं - बालकाण्ड, अयोध्यकाण्ड, अरण्यकाण्ड, सुन्दरकाण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, लङ्काकाण्ड और उत्तरकाण्ड। किसी ग्रंथ का वह विभाग जिसमें एक पूरा प्रसंग हो। किसी प्राकृतिक अप्रिय घटना को काण्ड नहीं कहते है।

सुन्दरकाण्ड

त्रेतायुग में लंका के क्षेत्रों में त्रिकूटांचल पर्वत समूह के सुबैल पर्वत क्षेत्र पर भगवान राम और राक्षस राज रावण का युद्ध स्थल, नील पर्वत क्षेत्र पर राक्षसों का निवास एवं महल, और सुंदर पर्वत के क्षेत्र में राक्षस राज रावण की प्रिय अशोक वाटिका थी।

अशोक वाटिका में माता सीता रहती थी । सुन्दरकाण्ड का अध्ययन या पाठ करने से सर्वार्थसिद्धि की प्राप्ति होती है । पवननंदन व अंजली पुत्र रामभक्त हनुमान द्वारा माता सीता की खोज में त्रिकुटांचल पर्वत पर बसी लंका में परिभ्रमण किया गया था। त्रिकूटपर्वत समूह की सुंदर पर्वत क्षेत्र में स्थित अशोक वाटिका में हनुमान जी और माता सीता से मुलाकात हुई थी। अशोकवाटिका में माता सीता द्वारा हनुमान जी को अष्ट सिद्धि एवं नाव निधि का वरदान दी गयी थी। रामायण और श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड में भगवान श्रीराम के गुणों और पुरूषार्थ को दर्शाती लेकिन सुंदरकांड श्रीराम के भक्त हनुमान की विजय का कांड है ! मनोवैज्ञानिक रूप में सुन्दरकाण्डम व सुन्दरकाण्ड मानवीय जीवन में आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति बढ़ाने वाला है। सुंदरकांड के अध्ययन एवं पाठ से व्यक्ति को मानसिक शक्ति प्राप्ति एवं कार्य को पूर्ण करनें के लिए आत्मविश्वास मिलता है ! हनुमानजी की उपासना से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
हनुमानजी समुद्र को लांघ कर लंका पहुंच गए | सुंदर पर्वत की अशोकवाटिका में रह रही माता सीता की खोज की, लंका को जलाया, सीता का संदेश लेकर भगवान श्रीराम के पास लौट आए थे। भक्त की जीत का सुंदरकाण्ड है। हनुमान जी अपनी इच्छाशक्ति के बल पर इतना बड़ा चमत्कार कर सकते है यही सर्वार्थसिद्धि की प्राप्ति का उदाहरण है।

सुंदरकांड में जीवन की सफलता के महत्वपूर्ण सूत्र और व्यक्ति में आत्मविश्वास बढ़ाता है। वाल्मीकीय रामायण का चतुर्दश: सर्ग: के अनुसार सुंदर पर्वत में स्थित अशोक वाटिका में हनुमसन जी का प्रवेश, उसकी शोभा देखना तथा अशोक वृक्ष पर छिपे रहकर वहीं मस्त सीता का अनुसंधान करने का उल्लेख है।

आज का चिंतन-प्रश्न

हनुमान जी की तरह, मेरे जीवन का कौन-सा 'समुद्र' है जिसे पार करने के लिए मुझे अपने भीतर की शक्ति का स्मरण करना है?