सुगमता
30विवेकचूड़ामणि · कड़ी 32 / 51

सचेतन — 30:  "अनात्म-निरूपण — सब कुछ जो आप नहीं हो\

सार

आज उल्टी दिशा से खोज: आप कौन नहीं हैं। शरीर हर 7 साल में बदल जाता है, पर 'आप' वही रहते हैं — तो आप शरीर नहीं। भाव आते-जाते हैं, पर देखने वाला रहता है — तो आप मन भी नहीं। जो-जो हटता जाए, उसके पीछे जो बचे — वही असली आप।

Read in English

Today the search runs in reverse: discovering what you are NOT. The body replaces itself every seven years, yet 'you' remain the same — so you are not the body; it is a vehicle, like a car you drive. Moods arrive and pass, yet the witness stays — so you are not the mind either. Remove everything you are not, and what remains is your true Self.

https://www.youtube.com/watch?v=_guDZz99nCk&feature=youtu.be

नमस्कार। अब तक हमने सीखा कि आप कौन हैं।

लेकिन आज हम सीखेंगे कि आप कौन नहीं हैं।ऽ

यह बहुत महत्वपूर्ण है।

क्यों?

क्योंकि जब आप सब कुछ हटाते जाते हो जो आप नहीं हो।

तो जो बचता है... वही असली आप हैं।

चलिए शुरू करते हैं।

शरीर को हटाओ

आप अपने शरीर को देखते हैं।

और सोचते हो — "यह मैं हूँ।"

लेकिन सवाल करो।

क्या शरीर आप हो?

शरीर बदलता है। हर 7 साल में सब कुछ नया होता है।

Cells change होते हैं। Hair change होते हैं। Skin change होता है।

लेकिन आप change नहीं होते।

आप वही हैं जो 5 साल पहले थे। 10 साल पहले थे। 20 साल पहले थे।

तो आप शरीर नहीं हो।

शरीर तो एक tool है। एक वाहन।

जैसे आप car चलाते हो... लेकिन आप car नहीं हैं।

वैसे ही आप शरीर चलाते हो... लेकिन आप शरीर नहीं हैं।

अगर कार टूट जाए, तो आप उसे repair करते हैं।

अगर शरीर टूट जाए (बीमार हो जाए, बूढ़ा हो जाए), तो आप repair करते हो।

Mind को हटाओ

आप अपने mind से identify करते हैं।

"मैं चिंतित हूँ। मैं खुश हूँ। मैं गुस्से में हूँ।"

लेकिन सवाल करो।

क्या आप mind हैं?

Mind तो बदलता है हर moment।

एक moment खुश हो, दूसरे moment sad।

एक moment angry, दूसरे moment calm।

लेकिन कौन सा part आप में है जो सबको observe कर रहा है?

"अरे, अभी मैं angry था। अब peaceful हूँ।"

यह observe करने वाला कौन है?

Mind तो change हो रहा है।

तो observer mind नहीं हो सकता।

Mind आप नहीं हैं।

Mind तो एक tool है। instrument।

जैसे आप radio सुनते हो... लेकिन radio नहीं है।

वैसे ही आप mind को operate करते हो... लेकिन mind नहीं है।

Senses को हटाओ

आप अपनी senses से live करते हो।

देखना, सुनना, सूँघना, खाना, छूना।

और सोचते हो — "यह सब मैं हूँ।"

लेकिन सवाल करो।

क्या आप senses हैं?

अगर आप blind हो जाएँ (देख नहीं सकते)।

क्या आप disappear हो गए?

नहीं। आप अभी भी हैं।

अगर आप deaf हो जाएँ (सुन नहीं सकते)।

क्या आप disappear हो गए?

नहीं। आप अभी भी हैं।

तो senses आप नहीं हैं।

Senses तो gates हैं। Windows।

बाहरी दुनिया से आने वाली information के लिए।

लेकिन आप जो देख रहे हैं... वह information नहीं है।

आप जो देख रहे हो... वह आप हैं।

World को हटाओ

आप इस दुनिया को देखते हैं।

और सोचते हो — "यह दुनिया real है। मैं इसका हिस्सा हूँ।"

लेकिन विवेकचूडामणि कहती है।

"यह दुनिया एक mirage मृगतृष्णा जैसी है।"

रेगिस्तान में कोई mirage देखता है।

दूर से water दिखता है। Pool दिखता है।

बहुत real लगता है।

लेकिन जब वह पास जाता है... सब गायब।

सिर्फ sand और heat बचते हैं।

वैसे ही दुनिया भी।

यह बहुत real लगती है।

लेकिन यह एक projection है। एक illusion।

Maya का खेल।

तो दुनिया आप नहीं हैं।

Everything को हटाओ

अब एक महत्वपूर्ण experiment करो।

सब कुछ को mentally हटाओ।

Body को हटा दो। "यह मैं नहीं हूँ।"

Mind को हटा दो। "यह मैं नहीं हूँ।"

Senses को हटा दो। "ये मैं नहीं हैं।"

Emotions को हटा दो। "ये मैं नहीं हैं।"

Thoughts को हटा दो। "ये मैं नहीं हैं।"

Memories को हटा दो। "ये मैं नहीं हैं।"

दुनिया को हटा दो। "वह मैं नहीं है।"

अब क्या बचता है?

कुछ नहीं दिखता। लेकिन... कुछ है।

वह जो सब कुछ देख रहा है।

वह जो सबको जानता भी है …. जाना करता है।

वह जो... बस है।

बिना किसी identity के।

बिना किसी property के।

बिना किसी experience के।

वही असली आप है।

अब समझते हैं

विवेकचूडामणि कहती है।

सब कुछ जो आप देख सकते हो — Anatman है।

Body — Anatman।

Senses — Anatman।

Mind — Anatman।.

Intellect — Anatman।

Ego — Anatman।

सब experiences (सुख, दुख) — Anatman।

पूरी दुनिया — Anatman।

आकाश, पृथ्वी, सब कुछ — Anatman।

लेकिन यह सब क्या है

सब कुछ जो आप देख सकते हो।

सब कुछ जो आप experience कर सकते हो।

सब mirage मृगतृष्णा जैसा है।

Real नहीं।

देखने में real लगता है।

लेकिन असली नहीं।

जैसे रेगिस्तान में water real दिखता है... लेकिन असली नहीं।

तो फिर Real क्या है

जो एक है। जो change नहीं होता। जो हमेशा है।

जो सब कुछ को देख रहा है। लेकिन खुद को नहीं देखा जा सकता।

जो सब को know करता है। लेकिन खुद को know नहीं किया जा सकता।

वही Real है।

वही Atman है।

वही आप हो।

आज का सवाल

आप अपने आप से पूछो।

"क्या मैं body हूँ? नहीं।"

"क्या मैं mind हूँ? नहीं।"

"क्या मैं senses हूँ? नहीं।"

"क्या मैं दुनिया हूँ? नहीं।"

तो फिर... "मैं कौन हूँ?"

आखिरी बात

यह सब जो आप देख रहे हो।

यह सब एक dream है।

एक मृगतृष्णा mirage है।

Real नहीं है।

लेकिन जो देख रहा है।

वह real है।

और वही आप हो।

जब यह बात समझ आ जाती है।

सब confusion खत्म हो जाता है।

सब fear खत्म हो जाता है।

क्योंकि आप को पता चल जाता है।

"मैं यह सब नहीं हूँ।"

"मैं तो हमेशा safe हूँ।"

"मैं तो हमेशा whole हूँ।"

यह था सचेतन।
🙏 Anatman को समझते ही Atman का पूरा सत्य खुल जाता है।

नमस्कार। 🙏

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आज का चिंतन-प्रश्न

'मैं चिंतित हूँ' कहने के बजाय अगर मैं कहूँ 'चिंता आई है और मैं उसे देख रहा हूँ' — तो मेरे भीतर क्या बदलता है?