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SACHETAN · मानोविकास MIHE
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आत्मबोध
65 कड़ियाँ · 15 दिसम्बर 2025 से 21 अप्रैल 2026 तक · क्रम से सुनिए-पढ़िए
15 दिसम्बर 2025 · कड़ी 1
सचेतन- 01: आत्मबोध की यात्रा -स्वयं को जानने की शुरुआत
16 दिसम्बर 2025 · कड़ी 2
सचेतन- 02: आत्मबोध की यात्रा - “ज्ञान ही मोक्ष का सीधा साधन है”
17 दिसम्बर 2025 · कड़ी 3
सचेतन- 03: आत्मबोध की यात्रा - “कर्म नहीं, ज्ञान ही अज्ञान को मिटाता है”
19 दिसम्बर 2025 · कड़ी 4
सचेतन- 04: आत्मबोध की यात्रा - “मैं सीमित नहीं हूँ— यह सिर्फ़ भ्रम है”
22 दिसम्बर 2025 · कड़ी 5
सचेतन- 05: आत्मबोध की यात्रा - “ज्ञान शुद्ध करता है… और फिर स्वयं विलीन हो जाता है”
23 दिसम्बर 2025 · कड़ी 6
सचेतन- 06: आत्मबोध की यात्रा -“संसार: एक जागता हुआ स्वप्न है”
24 दिसम्बर 2025 · कड़ी 7
सचेतन- 07: आत्मबोध की यात्रा -“जब तक ब्रह्म नहीं जाना— जगत सत्य लगता है”
26 दिसम्बर 2025 · कड़ी 8
सचेतन- 08: आत्मबोध की यात्रा - “जगत बुदबुदों जैसा है”
27 दिसम्बर 2025 · कड़ी 9
सचेतन- 09: आत्मबोध की यात्रा - “सब एक ही सत्य से बने हैं”
29 दिसम्बर 2025 · कड़ी 10
सचेतन- 10: आत्मबोध की यात्रा - “उपाधियाँ बदलती हैं— मैं नहीं”
30 दिसम्बर 2025 · कड़ी 11
सचेतन- 11: आत्मबोध की यात्रा - “मैं कौन हूँ? – पानी, रंग और मैं”
31 दिसम्बर 2025 · कड़ी 12
सचेतन- 12: आत्मबोध की यात्रा - “यह शरीर मेरा घर है, मैं घर नहीं हूँ”
1 जनवरी 2026 · कड़ी 13
सचेतन- 13: आत्मबोध की यात्रा - “मेरे अनुभव कहाँ से आते हैं?”
2 जनवरी 2026 · कड़ी 14
सचेतन- 14: आत्मबोध की यात्रा - जब आप सोते हैं, तब आप क्या होते हैं?
5 जनवरी 2026 · कड़ी 15
सचेतन- 15: आत्मबोध की यात्रा “मैं कौन हूँ — या सिर्फ़ परतों का रंग?”
6 जनवरी 2026 · कड़ी 16
सचेतन- 16: आत्मबोध की यात्रा -आप सिर्फ एक छिलका हैं असली चावल तो अंदर है
7 जनवरी 2026 · कड़ी 17
सचेतन- 17: आत्मा हर जगह है, फिर भी हमें दिखती क्यों नहीं?
8 जनवरी 2026 · कड़ी 18
सचेतन- 18: मैं राजा हूँ, मेरे भीतर सब चल रहा है
10 जनवरी 2026 · कड़ी 19
सचेतन- 19:भागते हुए चाँद का वो रहस्य जो शंकराचार्य ने बताया
13 जनवरी 2026 · कड़ी 20
सचेतन- 20: आपकी असली शक्ति सूरज नहीं कुछ और है
13 जनवरी 2026 · कड़ी 21
सचेतन- 21: आपकी सबसे बड़ी गलती, जो आप रोज़ करते हैं
15 जनवरी 2026 · कड़ी 22
सचेतन- 22: आप तनावग्रस्त क्यों महसूस करते हैं?
16 जनवरी 2026 · कड़ी 23
सचेतन- 23: वह प्राचीन पहचान की भूल, जो आपके सारे दुःख की जड़ है
17 जनवरी 2026 · कड़ी 24
सचेतन- 24: आप पहले से ही मुक्त हैं — लेकिन एक भ्रम में जी रहे हैं
19 जनवरी 2026 · कड़ी 25
सचेतन- 25 सबसे बड़ा झूठ जो आप रोज़ खुद से बोलते हैं
20 जनवरी 2026 · कड़ी 26
सचेतन- 26 सबसे बड़ा झूठ जो आपका मन हर पल आपसे बोलता है
21 जनवरी 2026 · कड़ी 27
सचेतन- 27 इस 5 मिनट की बात ने मेरी सालों पुरानी चिंता खत्म कर दी
27 जनवरी 2026 · कड़ी 28
सचेतन- 29 आपकी चेतना एक स्वयं-प्रकाशित सूर्य है
28 जनवरी 2026 · कड़ी 29
सचेतन- 30 – अहंकार का जन्म
29 जनवरी 2026 · कड़ी 30
सचेतन- 31 – जो टूटने वाला है, वह आप नहीं हो सकते
3 फ़रवरी 2026 · कड़ी 31
सचेतन- 33 –आत्मबोध – दुख, डर और अशांति आप नहीं हैं
4 फ़रवरी 2026 · कड़ी 32
सचेतन- 34 –आत्मबोध – ध्यान नहीं, पहचान की बात
5 फ़रवरी 2026 · कड़ी 33
सचेतन- 35 –आत्मबोध – “मैं आकाश के समान हूँ”
6 फ़रवरी 2026 · कड़ी 34
सचेतन- 36 –आत्मबोध – “मैं कौन हूँ?”
7 फ़रवरी 2026 · कड़ी 35
सचेतन- 37 –आत्मबोध – “निरंतर अभ्यास ही अज्ञान की बीमारी की औषधि है”
9 फ़रवरी 2026 · कड़ी 36
सचेतन- 38 –आत्मबोध – साधना से साक्षात्कार की ओर
12 फ़रवरी 2026 · कड़ी 37
सचेतन- 39 –आत्मबोध – “दृश्य जगत का आत्मा में विलय”
13 फ़रवरी 2026 · कड़ी 38
सचेतन- 40 –आत्मबोध – “नाम–रूप से परे, चिदानन्द में स्थित होना”
16 फ़रवरी 2026 · कड़ी 39
सचेतन- 41 –आत्मबोध “तुम जानने वाले नहीं… तुम स्वयं प्रकाश हो”
17 फ़रवरी 2026 · कड़ी 40
सचेतन- 42 –आत्मबोध “ज्ञान की आग कैसे जले?”
18 फ़रवरी 2026 · कड़ी 41
सचेतन- 43 –आत्मबोध “सूरज को जगाना नहीं पड़ता”
20 फ़रवरी 2026 · कड़ी 42
सचेतन- 44 –आत्मबोध “जिसे खोज रहे हो, वह पहले से तुम्हारे पास है”
23 फ़रवरी 2026 · कड़ी 43
सचेतन- 45 – आत्मबोध – “डर किससे था… जब था ही कुछ नहीं?”
2 मार्च 2026 · कड़ी 44
सचेतन- 46 –आत्मबोध; “मैं” और “मेरा” का भ्रम कब टूटेगा?”
5 मार्च 2026 · कड़ी 45
सचेतन- 47 –आत्मबोध; “जब सब कुछ मैं ही हूँ…”
6 मार्च 2026 · कड़ी 46
सचेतन- 48 –आत्मबोध “सब कुछ आत्मा ही है…”
7 मार्च 2026 · कड़ी 47
सचेतन- 49 –आत्मबोध “जीवन्मुक्त: जीते-जी आज़ाद होने की कहानी”
16 मार्च 2026 · कड़ी 48
सचेतन- 50 –आत्मबोध “मोहमाया का समुद्र और भीतर का राम”
17 मार्च 2026 · कड़ी 49
सचेतन- 51 – “बाहर की खुशी या भीतर का प्रकाश?”
19 मार्च 2026 · कड़ी 50
सचेतन- 52 – आत्मबोध – “दुनिया में रहकर भी, उससे अछूते कैसे रहें?”
23 मार्च 2026 · कड़ी 51
सचेतन- 53 – “मैं अलग नहीं… मैं वही हूँ”
24 मार्च 2026 · कड़ी 52
सचेतन- 54 – आत्मबोध – ब्रह्म क्या है?- “जिसे पा लिया… उसके बाद कुछ भी बाकी नहीं”
26 मार्च 2026 · कड़ी 53
सचेतन- 55– आत्मबोध – “जब सब खोज खत्म हो जाए…”
28 मार्च 2026 · कड़ी 54
सचेतन- 56 – आत्मबोध – “जो हर जगह है… वही तुम हो”
1 अप्रैल 2026 · कड़ी 55
सचेतन- 57 – आत्मबोध – “जो बचता है… वही तुम हो”
2 अप्रैल 2026 · कड़ी 56
सचेतन- 58 – आत्मबोध “जो खुशी हम ढूँढ रहे हैं… वह सिर्फ एक बूंद है”
4 अप्रैल 2026 · कड़ी 57
सचेतन- 59– आत्मबोध – “जो कुछ तुम देख रहे हो… वही ब्रह्म है”
6 अप्रैल 2026 · कड़ी 58
सचेतन- 60 – आत्मबोध “जो किसी भी रूप में नहीं आता… वही असली तुम हो”
7 अप्रैल 2026 · कड़ी 59
सचेतन- 61 – आत्मबोध “जो सबको रोशन करता है… उसे कौन रोशन करेगा?”
9 अप्रैल 2026 · कड़ी 60
सचेतन- 62 – आत्मबोध –“तुम बाहर भी हो… और भीतर भी — एक ही प्रकाश”
13 अप्रैल 2026 · कड़ी 61
सचेतन – 63 | आत्मबोध: “जो दिख रहा है… क्या वह सच में वैसा ही है?”
15 अप्रैल 2026 · कड़ी 62
सचेतन – 65 आत्मबोध “सत्य सामने है… फिर भी क्यों नहीं दिखता?”
16 अप्रैल 2026 · कड़ी 63
सचेतन – 66 | आत्मबोध ; “तुम पहले से ही चमक रहे हो… बस धूल हटानी है”
18 अप्रैल 2026 · कड़ी 64
सचेतन – 67 | आत्मबोध “ज्ञान का सूरज… जो भीतर उगता है”
21 अप्रैल 2026 · कड़ी 65
सचेतन – 68 | आत्मबोध “सबसे पवित्र तीर्थ… जो तुम्हारे भीतर है”