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सचेतन 126 : श्री शिव पुराण- शतरुद्र संहिता- तामसिक बनकर भजन नहीं हो सकता है।

अध्यात्म के अस्वीकृती के कारण हमारे जीवन में नकारात्मकता भर जाता है। जिस व्यक्ति में तामसी प्रकृति के गुण की प्रधानता हो जिसके अनुसार जीव क्रोध आदि नीच वृत्तियों के वशीभूत होकर आचरण करता है। व्यक्ति को निद्रा, आलस्य, आदि से उत्पन्न सुख का अहसास होता और इसे तामस सुख कहते हैं। जब आप जीवन…

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सचेतन 125 : श्री शिव पुराण- शतरुद्र संहिता- भीम रूप में शिव का वर्णन

भीम रूप भगवान शिव की आकाशरूपी मूर्ती का नाम है जिसकी अराधना से तामसी गुणों का नाश होता है जीवन में हो रहे ऊर्जा के रूपांतरण को रुद्र समझें! रुद्र के आठ रूपों का उल्लेख सर्व, भव, भीम, उग्र, ईशान, पशुपति, महादेव, असनी के रूप में किया गया है। सर्व नाम जल को दर्शाता है,…

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सचेतन 124 : श्री शिव पुराण- शतरुद्र संहिता- प्रार्थना, ध्यान और विचार का श्रवण एक आध्यात्मिक प्रक्रिया है

शांत, शुद्ध और निर्मल चित्त से  शिव की प्राप्ति संभव है!  सचेतन का श्री शिव पुराण पर विशेष विचारों के चिंतन का यह 124 वाँ सत्र है और सबसे पहला विचार यह था की  श्री शिव पुराण के ज्ञान मात्र से ही आपके आंतरिक विकास की प्रबल संभावनाएं बढ़ जाती हैं! सचेतन में विचार की…

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सचेतन 123 : श्री शिव पुराण- शतरुद्र संहिता- आध्यात्मिक प्रक्रिया अस्तित्व की खोज का एक आंतरिक मार्ग है 

अपने विचारों से दूर न भागें ।  मन को संतुलित करने के लिए हमको एक दृष्टिकोण बनाने की ज़रूरत होती है और हम स्वयं को ठीक करने का प्रयास करना शुरू करते हैं। अपने दृष्टिकोण बदलने की क्यों ज़रूरत है?  जब आप देखते हैं की आप अपने जीवन में पवित्र अनुष्ठान करना प्रारंभ कर देते…

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सचेतन 122 : श्री शिव पुराण- शतरुद्र संहिता- जीवन में पवित्र अनुष्ठान करना ही धर्म है

मन के विचारों से मुक्ति पाने और उन्हें शांत करने का तरीका भव जो पर्जन्य (मेघ) का सूचक है यह हमारे जीवन में बदलाव होने की अवस्था, क्रिया या भाव जिससे हमें अपनी सत्ता और सांसारिक अस्तित्व, को जन्म या उत्पत्ति करते हैं और यह आदतन या भावनात्मक प्रवृत्तियाँ मात्र है। यह एक मानसिक घटना…

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सचेतन 121 : श्री शिव पुराण- शतरुद्र संहिता- मन की स्थिति का अभ्यास करना

भव पर्जन्य (मेघ) का सूचक है अगर रुद्र समझना हो तो जीवन में हो रहे ऊर्जा के रूपांतरण को समझें! विज्ञान में, ऊर्जा वस्तुओं का एक गुण है, जो अन्य वस्तुओं को स्थानांतरित किया जा सकता है।  रुद्र के आठ रूपों का उल्लेख सर्व, भव, भीम, उग्र, ईशान, पशुपति, महादेव, असनी के रूप में किया…

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सचेतन 120 : श्री शिव पुराण- शतरुद्र संहिता-  पूर्ण संबंध और सर्व होने पर प्रेम होता है

त्वमेव माता च पिता त्वमेव त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव। त्वमेव विद्या च द्रविणं त्वमेव त्वमेव सर्वम् मम देवदेवं।। संसार में लोगों के साथ का सम्बन्ध अनिश्‍चित हैं! एक छण (पल) का भरोसा नहीं। अगर वह आपके अनुकूल रहे, आपके स्वार्थ की सिद्धि करे, तभी सम्बन्ध बना रहेगा।  यानि संसार में जब तक सम्बन्ध था, वह…

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सचेतन 119 : श्री शिव पुराण- शतरुद्र संहिता-  रुद्र – शरीर को विकसित करने का विज्ञान है

संसार के लोगों का सम्बन्ध अनिश्‍चित है! अगर रुद्र समझना हो तो जीवन में हो रहे ऊर्जा के रूपांतरण को समझें! विज्ञान में, ऊर्जा वस्तुओं का एक गुण है, जो अन्य वस्तुओं को स्थानांतरित किया जा सकता है।  रुद्र के आठ रूपों का उल्लेख सर्व, भव, भीम, उग्र, ईशान, पशुपति, महादेव, असनी के रूप में…

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सचेतन 118 : श्री शिव पुराण- शतरुद्र संहिता-  शरीर की  महत्वपूर्ण ऊर्जाएं 

अगर रुद्र समझना हो तो जीवन में हो रहे रूपांतरण को समझें।  रुद्र का उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है जो सूक्ष्म जगत, अंतरिक्ष के गोले, पृथ्वी और सूर्य के बीच के मध्य क्षेत्र का देवता है। यह रचनात्मक ऊर्जा प्रदान करता है जिससे सूक्ष्म जगत से जुड़ने का स्त्रोत बन सकता है। जब हम दिव्यता…

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सचेतन 117 : श्री शिव पुराण- शतरुद्र संहिता-  रूद्र, ब्रह्मांड की रचनात्मक ऊर्जा प्राप्त करने में हम सब की मदद करता है।

रूद्र, ब्रह्मांड की रचनात्मक ऊर्जा प्राप्त करने में हम सब की मदद करता है। इसका उपदेश ‘तत्पुरुष रूप’ में दर्शन देकर रुद्र गायत्री-मन्त्र का उपदेश भगवान शिव से स्वयं किया है – ‘तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रयोदयात्।’ रचनात्मक ऊर्जा और इस मन्त्र के अद्भुत प्रभाव से सृष्टि की रचनात्मक ऊर्जा के लिए आपको…