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  • सचेतन 3.05 : नाद योग: नाद बिंदु उपनिषद

    नाद बिंदु : ऋग्वेद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है 

    नमस्कार! हमारे विशेष नाद योग (योग विद्या) पर सचेतन के इस विचार के सत्र  में स्वागत है। आज हम चर्चा करेंगे नाद बिंदु उपनिषद के बारे में, जो ऋग्वेद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस उपनिषद में नाद योग के गूढ़ रहस्यों और ध्वनि के महत्व को समझाया गया है।

    नाद बिंदु उपनिषद का परिचय:

    नाद बिंदु उपनिषद ऋग्वेद के अंतर्गत आता है और यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण उपनिषद है। इसमें ध्वनि, नाद और उनके आध्यात्मिक महत्व को विस्तार से समझाया गया है। यह उपनिषद हमारे ध्यान, प्राणायाम और आत्म-साक्षात्कार की दिशा में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करता है।

    मुख्य बिंदु:

    1. नाद और बिंदु का महत्व:
      • नाद का अर्थ है ध्वनि और बिंदु का अर्थ है शून्य या बिंदु।
      • नाद बिंदु उपनिषद में ध्वनि और बिंदु के माध्यम से ध्यान और आत्म-साक्षात्कार के मार्ग को समझाया गया है।
      • नाद को ब्रह्म का प्रतीक माना गया है और बिंदु को आत्मा का।
    2. ध्वनि का महत्व:
      • नाद बिंदु उपनिषद में ध्वनि को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है।
      • यह कहा गया है कि ध्वनि के माध्यम से हम ब्रह्म के साथ एकाकार हो सकते हैं।
      • ध्वनि ध्यान में उपयोगी है और हमें गहरे ध्यान की स्थिति में ले जाती है।
    3. नाद योग:
      • नाद योग ध्वनि के माध्यम से योग का एक प्रकार है।
      • इसमें ध्वनि के विभिन्न स्तरों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
      • नाद योग के माध्यम से हम अपनी चेतना को उच्च स्तर पर ले जा सकते हैं और आत्म-साक्षात्कार प्राप्त कर सकते हैं।
    4. प्रणव का महत्व:
      • नाद बिंदु उपनिषद में ॐ का विशेष महत्व बताया गया है।
      • ॐ को ब्रह्मांड की प्राथमिक ध्वनि माना गया है।
      • ॐ के माध्यम से ध्यान और प्राणायाम के अभ्यास का वर्णन किया गया है।
    5. ध्यान की विधि:
      • नाद बिंदु उपनिषद में ध्यान की विधि का वर्णन किया गया है।
      • इसमें ध्वनि के माध्यम से ध्यान लगाने की प्रक्रिया को विस्तार से बताया गया है।
      • ध्यान के माध्यम से आत्म-साक्षात्कार की दिशा में अग्रसर होने के मार्ग को समझाया गया है।

    ध्यान की प्रक्रिया:

    1. शांत और स्वच्छ स्थान पर बैठें।
    2. सिद्धासन या किसी आरामदायक मुद्रा में बैठकर रीढ़ की हड्डी सीधी रखें।
    3. आँखें बंद करें और गहरी श्वास लें।
    4. धीरे-धीरे ॐ की ध्वनि को मन में गूंजने दें।
    5. नाद पर ध्यान केंद्रित करें और आत्मा की गहराईयों में प्रवेश करें।

    नाद बिंदु उपनिषद का प्रभाव:

    नाद बिंदु उपनिषद का अध्ययन और अभ्यास हमें आत्म-साक्षात्कार और मोक्ष की दिशा में अग्रसर करता है। यह उपनिषद हमारे ध्यान, प्राणायाम और आत्म-साक्षात्कार की प्रक्रिया को समझने में सहायक है। नाद योग के माध्यम से हम अपनी चेतना को उच्च स्तर पर ले जा सकते हैं और ब्रह्म के साथ एकाकार हो सकते हैं।

    निष्कर्ष:

    नाद बिंदु उपनिषद ऋग्वेद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और यह हमारे ध्यान, प्राणायाम और आत्म-साक्षात्कार की दिशा में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करता है। यह उपनिषद हमें ध्वनि के माध्यम से ब्रह्म के साथ एकाकार होने का मार्ग दिखाता है।

    आज के सत्र में इतना ही। हमें आशा है कि आपको नाद बिंदु उपनिषद के इस गहन विषय के बारे में जानकर अच्छा लगा होगा। हम फिर मिलेंगे एक नए विषय के साथ। तब तक के लिए, ध्यान में रहें, खुश रहें और नाद की ध्वनियों से अपने जीवन को मधुर बनाएं।

    नमस्कार!

  • सचेतन 3.04 : नाद योग: ॐ को हंस के रूप में दर्शाना

    प्रस्तावना और परिचय:

    ॐ नमः शिवाय! आप सभी का स्वागत है हमारे विशेष नाद योग (योग विद्या) पर सचेतन के इस विचार के सत्र  में। आज हम नाद बिंदु उपनिषद के गहन और पवित्र ज्ञान ॐ को हंस के रूप में दर्शाना के बारे में चर्चा करेंगे। हमारी यात्रा की शुरुआत प्रार्थना ॐ से करते हैं। आइए, सब मिलकर प्रार्थना करें:

    ॐ! हे परमपिता परमात्मा! मेरी वाणी और मेरे मन में अच्छी तरह से स्थिर हों, मेरी मन मेरी वाणी में अच्छी तरह से स्थित हों। हे अव्यक्त प्रकाश रूप परमेश्वर, हमारे लिए आप प्रकट हों। हे प्रभु, वेद शास्त्रों में जो सत्य बताये गए हैं उन सबको मैं अपने मन और वाणी द्वारा सीखूँ। अपना सीखा हुआ ज्ञान कभी नहीं भूलूँ। मैं पढ़ने-लिखने में दिन-रात एक कर दूँ। मैं हमेशा सत्य ही सोचूँ, मन हमेशा सत्य ही बोलूँ। सत्य हमेशा मेरी रक्षा करे, मेरे आचार्य और मेरे गुरु की सदा रक्षा करें। रक्षा करे मेरी और रक्षा करे मेरे गुरु की। ॐ शान्ति, शान्ति, शान्ति ॐ।

    ॐ को हंस के रूप में दर्शाना: गहनता और महत्व

    ॐ को हंस के रूप में दर्शाना और इसका महत्व बहुत ही विषय गहन और पवित्र है, और आज हम इस पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

    ॐ का हंस के रूप में प्रतीकात्मकता:

    ॐ को हंस के रूप में दर्शाना भारतीय आध्यात्मिकता और दर्शन में एक महत्वपूर्ण प्रतीक है। हंस को ज्ञान, पवित्रता और दिव्यता का प्रतीक माना जाता है। आइए, इस प्रतीकात्मकता के विभिन्न पहलुओं को समझें:

    1. ज्ञान का प्रतीक:
      • हंस को संस्कृत में ‘परम हंस’ कहा जाता है, जिसका अर्थ है सर्वोच्च आत्मा।
      • हंस को ज्ञान और विवेक का प्रतीक माना जाता है।
      • जैसे हंस दूध और पानी को अलग कर सकता है, वैसे ही ज्ञान और विवेक से हम सत्य और असत्य को अलग कर सकते हैं।
    2. पवित्रता और दिव्यता:
      • हंस को पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। वह जल में रहता है, लेकिन उसके पंख कभी भी गीले नहीं होते।
      • यह हमें सिखाता है कि हमें संसार में रहते हुए भी संसार के मोह-माया से अछूते रहना चाहिए।
      • हंस को श्वेत वर्ण का माना जाता है, जो पवित्रता और दिव्यता का प्रतीक है।
    3. आध्यात्मिकता और मोक्ष:
      • हंस को आत्मा का प्रतीक माना जाता है, जो जीवन और मृत्यु के बंधनों से मुक्त होकर मोक्ष की दिशा में अग्रसर होता है।
      • ॐ की ध्वनि और हंस का स्वरूप हमें आत्म-साक्षात्कार और मोक्ष की दिशा में प्रेरित करते हैं।
    4. प्राचीन ग्रंथों में हंस:
      • प्राचीन वेदों और उपनिषदों में हंस का वर्णन व्यापक रूप से मिलता है।
      • हंस को ब्रह्मा का वाहन माना जाता है, जो सृजन का प्रतीक है।
      • यह हमें सृजन की शक्ति और आत्म-साक्षात्कार की दिशा में प्रेरित करता है।
    5. योग और ध्यान में हंस:
      • योग और ध्यान में हंस का प्रतीक महत्वपूर्ण है।
      • हंस मंत्र का उपयोग ध्यान और प्राणायाम में किया जाता है।
      • यह मंत्र हमारे मन और आत्मा को शुद्ध करता है और ध्यान की गहराईयों में प्रवेश कराता है।

    हंस और प्राणायाम:

    प्राणायाम के विभिन्न चरणों में हंस का प्रतीक महत्वपूर्ण होता है। पूरक, कुम्भक और रेचक के माध्यम से हम अपने प्राण (श्वास) को नियंत्रित कर सकते हैं और आत्मा की गहराईयों में प्रवेश कर सकते हैं। हंस मंत्र का उपयोग प्राणायाम में शांति और स्थिरता लाता है।

    हंस और ध्यान:

    ध्यान की विधि में हंस मंत्र का उपयोग महत्वपूर्ण है। शांत और स्वच्छ स्थान पर बैठकर, सिद्धासन या किसी आरामदायक मुद्रा में बैठें। रीढ़ की हड्डी सीधी रखें और आँखें बंद कर लें। धीरे-धीरे हंस मंत्र को मन में गूंजने दें। यह मंत्र हमारे मन और आत्मा को शुद्ध करता है और आत्म-साक्षात्कार की दिशा में अग्रसर करता है।

    निष्कर्ष:

    ॐ को हंस के रूप में दर्शाना नाद योग का एक महत्वपूर्ण और गहन पहलू है। यह प्रतीक हमें ज्ञान, पवित्रता, दिव्यता और आत्म-साक्षात्कार की दिशा में प्रेरित करता है। हंस मंत्र के माध्यम से हम अपने जीवन को शुद्ध और पवित्र बना सकते हैं।

    आज के लिए बस में इतना ही। हमें आशा है कि आपको ॐ को हंस के रूप में दर्शाने के इस गहन विषय के बारे में जानकर अच्छा लगा होगा। हम फिर मिलेंगे एक नए विषय के साथ। तब तक के लिए, ध्यान में रहें, खुश रहें और नाद की ध्वनियों से अपने जीवन को मधुर बनाएं।

    नमस्कार!

  • सचेतन 3.03 : नाद योग: ॐ का महत्व

    नाद योग में ॐ का प्रयोग

    नमस्कार दोस्तों,

    स्वागत है आपका हमारे विशेष नाद योग (योग विद्या) पर सचेतन के इस विचार के सत्र  में। आज हम एक ऐसे विषय पर चर्चा करने जा रहे हैं जो न केवल आध्यात्मिक है बल्कि हमारे मन और शरीर के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। आज का विषय है – नाद योग में प्रार्थना ॐ से आरम्भ क्यों करते हैं।

    परिचय

    नाद योग एक प्राचीन भारतीय आध्यात्मिक पद्धति है जो ध्वनि और संगीत के माध्यम से आत्मज्ञान प्राप्त करने पर केंद्रित है। इसमें ध्वनि, संगीत, और मंत्रों का उपयोग किया जाता है ताकि मन को शांति और ध्यान की स्थिति में लाया जा सके। और जब हम नाद योग की बात करते हैं, तो ॐ का महत्व सबसे पहले आता है। लेकिन आखिर ॐ ही क्यों? इस प्रश्न का उत्तर हम आज विस्तार से जानेंगे।

    ॐ का महत्व

    ॐ, जिसे ओम या औम भी कहा जाता है, एक बीज मंत्र है जिसे संपूर्ण ब्रह्मांड की ध्वनि माना जाता है। यह तीन ध्वनियों से मिलकर बना है: ‘अ’, ‘उ’, और ‘म’। ये तीन ध्वनियाँ मिलकर संपूर्णता का प्रतीक हैं और इन्हें तीनों लोकों – भूत, भविष्य और वर्तमान का प्रतिनिधित्व भी माना जाता है।

    1. ‘अ’ ध्वनि – सृष्टि की शुरुआत, जागृति और भौतिक संसार का प्रतीक है।
    2. ‘उ’ ध्वनि – ऊर्जा, प्रगति और संवर्धन का प्रतीक है।
    3. ‘म’ ध्वनि – संपूर्णता, मुक्ति और निर्वाण का प्रतीक है।

    नाद योग में ॐ का प्रयोग

    नाद योग में प्रार्थना ॐ से आरम्भ करने के पीछे कई गहरे आध्यात्मिक और वैज्ञानिक कारण हैं:

    1. ध्यान और एकाग्रता: ॐ का उच्चारण करते समय उत्पन्न ध्वनि और कंपन मन को एकाग्र और शांत करने में मदद करता है। यह मन को वर्तमान क्षण में केंद्रित करता है और मानसिक विक्षेपों को दूर करता है।
    2. शरीर में ऊर्जा का प्रवाह: ॐ के उच्चारण से उत्पन्न कंपन शरीर के विभिन्न ऊर्जा केंद्रों (चक्रों) को सक्रिय करता है। यह विशेष रूप से मस्तिष्क और हृदय को प्रभावित करता है, जिससे ऊर्जा का संतुलन और प्रवाह बेहतर होता है।
    3. आध्यात्मिक जागृति: ॐ का नियमित अभ्यास आत्मा को शुद्ध करता है और आत्मज्ञान की दिशा में प्रगति को प्रोत्साहित करता है। यह आत्मा और परमात्मा के बीच के संबंध को मजबूत करता है।

    विज्ञान भी मानता है ॐ का प्रभाव

    हाल ही में किए गए कई वैज्ञानिक अध्ययनों ने भी यह साबित किया है कि ॐ का उच्चारण मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है। ॐ के उच्चारण से न केवल स्ट्रेस और एंग्जायटी कम होती है बल्कि यह दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित करने में मदद करता है।

    निष्कर्ष

    तो दोस्तों, नाद योग में ॐ से प्रार्थना आरम्भ करने के पीछे गहरे आध्यात्मिक और वैज्ञानिक कारण हैं। यह केवल एक ध्वनि नहीं, बल्कि संपूर्ण ब्रह्मांड की ऊर्जा और चेतना का प्रतीक है। नियमित रूप से ॐ का उच्चारण करने से हम न केवल मानसिक शांति और ध्यान की स्थिति प्राप्त कर सकते हैं बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य में भी सुधार कर सकते हैं।

    समाप्ति

    आशा है कि आज का विचार का सत्र आपको पसंद आया होगा और आपने ॐ के महत्व को गहराई से समझा होगा। अगले सत्र में हम एक और रोचक और ज्ञानवर्धक विषय पर चर्चा करेंगे। तब तक के लिए, ध्यान और प्रार्थना में ॐ का अभ्यास करें और अपनी आत्मा को शांति और ऊर्जा से भरें।

    धन्यवाद!


    समाप्त

    यह था हमारा आज का सत्र “नाद योग में प्रार्थना ॐ से आरम्भ क्यों करते हैं”। हम आपके सुझाव और प्रश्नों का स्वागत करते हैं। हमें अपने फीडबैक अवश्य भेजें ताकि हम आपके लिए और भी बेहतर विचार के विषय ला सकें।

    धन्यवाद और नमस्ते!

  • सचेतन 3.02 : नाद योग: ख़ुशी के लिए नाद योग

    सचेतन 3.02 : नाद योग: ख़ुशी के लिए नाद योग

    अ, ऊ, म ध्वनियों का शरीर पर प्रभाव

    नमस्कार दोस्तों! स्वागत है आपका हमारे विशेष नाद योग (योग विद्या) पर सचेतन के इस विचार के सत्र  में। आज हम आपको एक ऐसे विषय के बारे में बताएंगे, जिसे जानकर आपकी योग साधना में चार चांद लग जाएंगे। आज का हमारा विषय है ‘ख़ुशी के लिए योग-नाद योग’। यह विषय न सिर्फ आपको योग के महत्व को समझाएगा, बल्कि इसके वैज्ञानिक पहलुओं से भी अवगत कराएगा। तो चलिए, शुरू करते हैं।

    आधुनिक विज्ञान ने यह साबित कर दिया है कि यह सारा अस्तित्व पलभर का है। जहां कम्पन होता है, वहां ध्वनि होती है। इसलिए यह सारा अस्तित्व एक ध्वनि है। ध्वनियों के इस जटिल संगम की मूल ध्वनि है – अ, ऊ, म। यह तीन ध्वनियां हमारे अस्तित्व की मूल ध्वनियां हैं और इन्हीं से अन्य ध्वनियों का सृजन होता है।

    मूल ध्वनियां:

    आप अपनी जीभ का प्रयोग किए बिना सिर्फ यही तीन ध्वनियां अपने मुँह से निकाल सकते हैं। ‘अ’, ‘ऊ’ और ‘म’ अपने मुँह के गड्ढे में अलग-अलग जगह रखते हुए आप इन तीन ध्वनियों को मिला सकते हैं और तमाम दूसरी ध्वनियां बना सकते हैं। अ, ऊ एवं म उन तमाम ध्वनियों का आधार हैं, जिन्हें आप उच्चारण कर सकते हैं। इन्हें मूल ध्वनि या सार्वभौमिक ध्वनि कहते हैं।

    आउम ध्वनि:

    अगर आप इन तीन ध्वनियों का साथ में उच्चारण करें तो ‘आउम’ ध्वनि उत्पन्न होती है। जब हम तंत्र को इन तीन ध्वनियों को सचेत कर सावधानी से उच्चारण करते हैं, तो हमारे शरीर के विभिन्न पहलु सक्रिय हो जाते हैं और ऊर्जावान हो जाते हैं।

    ध्वनियों का प्रभाव:

    अब हम देखते हैं कि इन ध्वनियों का शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है:

    • ‘अ’ ध्वनि: जब आप ‘अ’ ध्वनि का उच्चारण करते हैं, तो कम्पन नाभि से ठीक नीचे होता है और फिर पूरे शरीर में फैल जाता है। हमारे 72 हज़ार नाड़ियों में ऊर्जा के माध्यम मिलते हैं और ये कम्पन पूरे शरीर में फैल जाते हैं। यह शरीर का रखरखाव केंद्र है, और ‘अ’ ध्वनि का उच्चारण इसे मजबूत करता है।
    • ‘ऊ’ ध्वनि: जब आप ‘ऊ’ ध्वनि का उच्चारण करते हैं, तो आपका ध्यान उस बिंदु पर जाता है, जहां पसलियां (ribs) चलती हैं और उसके ठीक नीचे एक नरम स्थान होता है। यहां से कम्पन शुरू होता है और ऊपर की ओर जाता है।
    • ‘म’ ध्वनि: जब आप ‘म’ ध्वनि का उच्चरण करते हैं, तो कम्पन आपके गले से शुरू होता है और शरीर के ऊपरी हिस्से में फैल जाता है।

    योग-नाद योग के लाभ:

    योग-नाद योग का नियमित अभ्यास करने से हमारे शरीर में ऊर्जा का प्रवाह संतुलित होता है। इससे मानसिक शांति, ध्यान की गहराई और आंतरिक खुशी मिलती है। जब आप इन ध्वनियों का उच्चारण करते हैं, तो आपके शरीर में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है जो आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुधारता है।

    समापन:

    दोस्तों, आज हमने जाना कि कैसे ‘अ’, ‘ऊ’ और ‘म’ ध्वनियां हमारे शरीर और मन को संतुलित और ऊर्जावान बनाती हैं। योग-नाद योग के माध्यम से हम न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी स्वस्थ रह सकते हैं।

    हमारे अगले एपिसोड में हम और भी रोचक योग विधियों और उनके लाभों पर चर्चा करेंगे। तब तक के लिए स्वस्थ रहें, खुश रहें और योग करते रहें। नमस्कार!


    ध्यान दें: यह सचेतन का विचार, श्रोताओं को योग के वैज्ञानिक और आध्यात्मिक पहलुओं को समझाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी योग अभ्यास को शुरू करने से पहले एक योग्य योग प्रशिक्षक से परामर्श लें।