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सचेतन :50 श्री शिव पुराण- शिवलिंग की पूजा, सेवा और जप करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

सचेतन :50 श्री शिव पुराण- शिवलिंग की पूजा, सेवा और जप करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। 👏 Sachetan: Worshiping, serving and chanting of Shivling fulfils all desires. शिवलिंग भगवान शिव की रचनात्मक और विनाशकारी दोनों ही शक्तियों को प्रदर्शित करता है। शिवलिंग का अर्थ होता है ‘सृजन ज्योति’ यानी भगवान शिव का आदि-अनादि स्वरुप।…

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सचेतन :49 श्री शिव पुराण- कैसे करें शिवलिंग की प्राणप्रतिष्ठा

सचेतन :49 श्री शिव पुराण- कैसे करें शिवलिंग की स्थापना और प्राणप्रतिष्ठा? ऋषियों ने पूछा- सूत जी ! शिवलिंग की स्थापना कैसे करनी चाहिए? उसका लक्षण क्या है? तथा उसकी पूजा कैसे करनी चाहिए किस देश काल में करनी चाहिए और किस द्रव्य के द्वारा उसका निर्माण होना चाहिए श्रुति जी ने कहा महर्षि मैं…

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सचेतन :47. श्री शिव पुराण- कैसे करें शिवलिंग की स्थापना?

सचेतन :47. श्री शिव पुराण- कैसे करें शिवलिंग की स्थापना? Sachetan:How to establish Shivling? शिव जी कहते हैं की मेरा या मेरे लिंगका दर्शन प्रभातकालमें ही – प्रातः और संगव (मध्याह्नके पूर्व ) कालमें करना चाहिये। मेरे दर्शन-पूजन के लिये चतुर्दशी तिथि निशीथ व्यापिनी अथवा प्रदोष व्यापिनी लेनी चाहिये। निशीथ काल: रात्रि का आठवां मुहूर्त…

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सचेतन :46. श्री शिव पुराण- भगवान शिव के दर्शन और पूजा के मुहूर्त का विधान

सचेतन :46. श्री शिव पुराण- भगवान शिव के दर्शन और पूजा के मुहूर्त का विधान  Sachetan:When is the time for darshan and worship of Lord Shiva शिव जी कहते हैं की मेरा या मेरे लिंगका दर्शन प्रभातकालमें ही – प्रातः और संगव (मध्याह्नके पूर्व ) कालमें करना चाहिये। मेरे दर्शन-पूजन के लिये चतुर्दशी तिथि निशीथ…

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सचेतन :45. श्री शिव पुराण- गायत्री मंत्र से 24 शक्तियों की प्राप्ति होती है

सचेतन :45. श्री शिव पुराण- गायत्री मंत्र से 24 शक्तियों की प्राप्ति होती है Sachetan:Gayatri Mantra gives 24 powers गायत्री मन्त्र में चौबीस अक्षर होते हैं, यह 24 अक्षर चौबीस शक्तियों-सिद्धियों के प्रतीक हैं। यह मन्त्र विश्वामित्र के इस सूक्त के 18 मन्त्रों में केवल एक है, किन्तु अर्थ की दृष्टि से इसकी महिमा का…

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सचेतन :44. श्री शिव पुराण-त्रिपदा गायत्री

सचेतन :44. श्री शिव पुराण-त्रिपदा गायत्री  Sachetan:Tripada Gayatri मातृका में बावन अक्षर बताये गए हैं । इनमें सबसे प्रथम अक्षर ॐकार है । उसके सिवा चौदह स्वर, तैतीस व्यंजन, अनुस्वर, विसर्ग, जिव्हामूलीय तथा उप्षमानीय – ये सब मिला कर बावन मातृका वर्ण माने गए हैं । मातृका शब्द से प्राण-शक्ति का बोध होता है |…

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सचेतन :42. श्री शिव पुराण-पंचाक्षर-मंत्र से माता की महाशक्ति का आभास होत…

सचेतन :42. श्री शिव पुराण-पंचाक्षर-मंत्र से माता की महाशक्ति का आभास होता है Sachetan:Panchakshar-mantra gives a feeling of Mother’s super power इस पंचाक्षर-मंत्र से मातृका वर्ण प्रकट हुए हैं। जो पाँच भेद वाले हैं। उसी से शिरो मंत्र सहित त्रिपदा गायत्रीका प्राकट्य हुआ है। उस गायत्री से सम्पूर्ण वेद प्रकट हुए हैं और उन वेदोंसे…

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सचेतन :43. श्री शिव पुराण-मातृका महाशक्ति क्या है?

सचेतन :43. श्री शिव पुराण-मातृका महाशक्ति क्या है?  Sachetan:What is the mother’s superpower? सप्तमातृकाएं ये सात देवियां ब्रह्माणी, वैष्णवी, माहेश्वरी, ऐन्द्री, कौमारी, वाराही और नारसिंही है। शुंभ और निशुंभ राक्षसों से लड़ते समय देवी की सहायता के लिए सभी देवो ने अपनी-अपनी सात शक्तियां भेजी थी। यह सात शक्तियां ही सप्तमातृकाएं हैं जो शरीर के…

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सचेतन :41. श्री शिव पुराण- शिव पंचाक्षर स्तोत्र

सचेतन :41. श्री शिव पुराण- शिव पंचाक्षर स्तोत्र Sachetan:Shiv Panchakshar Stotra प्रणव मंत्र ॐ पहले शिव जी के उत्तरवर्ती मुख से अकार के रूप में, पश्चिम – मुखसे उकार के रूप में, दक्षिण मुखसे मकार के रूप में और इ पूर्ववर्ती मुख से विन्दुका तथा मध्यवर्ती मुख – नादका प्राकट्य हुआ। इस प्रकार पाँच अवयवोंसे…

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सचेतन :40. श्री शिव पुराण- पंचाक्षर मन्त्र – ॐ नमः शिवाय और ​​भगवान शिव का ध्यान

सचेतन :40. श्री शिव पुराण- पंचाक्षर मन्त्र – ॐ नमः शिवाय और ​​भगवान शिव का ध्यान  Sachetan:Panchakshara Mantra – Om Namah Shivay and Meditation on Lord Shiva सृष्टि’, ‘पालन’, ‘संहार’, ‘तिरोभाव’ और ‘अनुग्रह’ – यह पांच  जगत संबंधी कार्य हैं जो नित्य सिद्ध है संस्कार है। इनमें से जो पाँचवाँ कृत्य अनुग्रह है वह मोक्ष…