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सचेतन 2.12: रामायण कथा: सुन्दरकाण्ड – हनुमान जी अप्रत्यक्ष उपमान अलंकार हैं।

हनुमान जी से आप सीख ले कर सिर्फ़ कर्म को विशिष्टता और उत्कृष्टता के साथ करते रहें।  अलंकार चारुत्व को कहते हैं। यह हनुमान जी  का सौंदर्य, चारुत्व, काव्य रूप में उनकी शोभा का धर्म ही अलंकार का व्यापक अर्थ है। यह अलंकार को महर्षि वाल्मीकि ने रामायण में प्राणभूत तत्त्व के रूप में लिखा…

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सचेतन 2.11: रामायण कथा: सुन्दरकाण्ड – उत्कृष्टता के प्रदर्शन में विशेष उपमा होती है

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सचेतन 2.10: रामायण कथा: सुन्दरकाण्ड – आपके कार्य में उत्कृष्टता स्वाभाविक होनी चाहिये।

हनुमान्जी की पिंगल नेत्र चन्द्रमा और सूर्यके समान प्रकाशित होती है। आप को विचार करना है की अगर आपका लक्ष्य और रणनीति सही है तो हर कोई आपके साथ चलने को तैयार है और आपको साथ देंगे।  मेघ के समान विशालकाय हनुमान्जी अपने साथ खींचकर आये हुए वृक्षों के अंकुर और कोर सहित फूलों से…

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सचेतन 2.9: रामायण कथा: सुन्दरकाण्ड –  हर कार्य में लक्ष्य और विकल्प दोनों होना चाहिए

हनुमान जी के लक्ष्य में विकल्प था की मैं लंकापुरी  जाऊँगा यदि लंका में जनकनन्दिनी सीता को नहीं देखूँगा तो राक्षसराज रावण को बाँधकर लाऊँगा। हनुमानजी अपने तेजस्वी और पराक्रमी बल से सीताजी के खोज के लिए लम्बे मार्ग पर दृष्टि दौड़ाने के लिये नेत्रोंको ऊपर उठाया और आकाश की ओर देखते हुए प्राणों को…

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सचेतन 2.8: रामायण कथा: सुन्दरकाण्ड – अपने तेज, बल और पराक्रम के आवेश और प्राणों को हृदयमें रोककर कार्य की तैयारी करें।

स्वातिक चिन्ह प्रायः साँप के फणों में दिखाई देनेवाली नीली रेखाओं को कहते हैं। सबने हनुमान जी के विशाल दृश्य का अहसास किया उन्होंने जो संकल्प लिया और उन कार्य को करने के लिए अपने शारीरिक बल का आवाहन किया।  कहते हैं की वो पर्वत के समान विशालकाय महान वेगशाली पवनपुत्र हनुमान्जी वरुणालय समुद्र को…

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सचेतन 2.7: रामायण कथा: सुन्दरकाण्ड – आपके घोषणा में इतनी तीव्रता होनी चाहिए की चारों ओर हलचल मच जाये

समुन्द्र ने हनुमान जी के बाहुवल के कारण उनको श्री रघुनाथ जी का दूत समझकर मैनाक पर्वत से कहा कि है अपने ऊपर इन्हे विश्राम दे। कल हमने बात किया था की सामान्य समझदारी वाले संकल्प से कार्य सिद्धी होती है। जब भी हम काम की तैयारी करें तो सबसे पहले आपने शारीरिक और मानसिक…

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सचेतन 2.6: रामायण कथा: सुन्दरकाण्ड – संकल्प से कार्य सिद्धी होती है

काम की तैयारी में सबसे पहले आपने शारीरिक और मानसिक बल का विस्तार करना चाहिए  जामवंत के सुन्दर वचन हनुमान जी के हृदय को बहुत ही भाए और सुनकर वे बोले हे भाई !  तुम लोग दुःख सहकर , कन्द-मूल-फल खाकर तब तक मेरी राह देखना ।।  जब लगि आवौं सीतहि देखी। होइहि काजु मोहि…

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सचेतन 2.5: रामायण कथा: सुन्दरकाण्ड – उचित ज्ञान और प्रभु के आशीर्वाद से सब कुछ कर सकते हैं 

जामवंत के बचन सुहाए। सुनि हनुमंत हृदय अति भाए।।

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सचेतन 2.3: रामायण कथा: सुन्दरकाण्ड – अंतरात्मा में राम की भक्ति ही हनुमान का रूप है

राम का इतिहास सनातन और अप्रमेय है जिसके प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती है यह हर काल में मौजूद था और रहेगा। रामभक्त हनुमान जी, माया से मनुष्य रूप में दीखने वाले और  राम कहलाने वाले जगदीश्वर को शांत, सनातन, अप्रमेय (प्रमाणों से परे), निष्पाप, मोक्षरूप परम् शांति देने वाले महसूस करते हुए, ब्रह्मा, शम्भु…

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सचेतन 2.2: रामायण कथा: सुन्दरकाण्ड – हे रघुनाथ जी आप सबके अंतरात्मा हैं

मनोवैज्ञानिक रूप में सुन्दरकाण्ड मानवीय जीवन में आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति बढ़ाने वाला है। रामान्य त्रेतायुग की कथा है और सुंदरकांड लंका में त्रिकूटांचल पर्वत शृंखला में एस एक के सुंदर पर्वत के क्षेत्र की कथा है इस पर्वत में दो अन्य शृंखला हैं सुबैल पर्वत क्षेत्र जहां पर भगवान राम और राक्षस राज रावण का…