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सचेतन 144 : श्री शिव पुराण- ईश्वरीय गुण 

शिवरूप सनातन है  शिवजी कहते हैं ;– मैं सृष्टि, पालन और संहार का कर्ता हूं। मेरा स्वरूप सगुण और निर्गुण है! मैं ही सच्चिदानंद निर्विकार परमब्रह्म और परमात्मा हूं।  ईश्वरीय गुण आने के बाद आप अपने कर्म व स्वभाव को जानना प्रारंभ कृति हैं जिससे आपका संबंध संसार के साथ और मज़बूत होता है।  ईश्वर…

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सचेतन 143 : श्री शिव पुराण- ईश्वर का दर्शन संभव है।

जीवन के आनंदमय यात्रा में सृष्टि का आभास  श्री शिव पुराण की कथा हमारे जीवन के विकास की अनंत संभावनाओं को बताता है।लेकिन इन संभावनाओं के होते हुए भी, हम जीवन में वो हासिल नहीं कर पाते जिसके हम योग्य होते हैं, इसका कारण सिर्फ यही है की हम ख़ुद को नहीं पहचान पाते हैं।   …

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सचेतन 142 : श्री शिव पुराण- शिवोहम

हम यह कहें की शिव तत्व आपको सत् से प्रीति करा कर आपके दुःख का नाश अवश्यंभावी कर देता है। प्रत्येक अवस्थाओं का साक्षी होना ही शिव है, सत् है, यही ईश्वर है, यही चैतन्य है, यही ज्ञानस्वरूप है और यही आनंद स्वरूप है। समस्त शास्त्र, तपस्या, यम और नियमों का निचोड़ यही है कि…

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सचेतन 141 : श्री शिव पुराण- शिव तत्व आपके विश्वास का नाम है

शिव तत्व के प्रवेश मात्र से आपको वर्तमान परिस्थित का ज्ञान होता जाएगा।  शिव तत्व आपके विश्वास का नाम है। जब आप अपने आप को सिर्फ़ कारण या निमित्त मात्र सोच कर विश्वास करते हैं और आप इस विचार मात्र को सत्य मानते हैं की कोई है जो आपको सहयोग करेगा और आप धीरज रखकर…

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सचेतन 140 : श्री शिव पुराण- आख़िर शिवतत्व है क्या?

शिव ‘सत्’ यानी सत्य है  श्री शिव पुराण की कथा में ब्रह्मा जी महर्षि नारद से कहते हैं की – हे नारद! तुम सदैव जगत के उपकार में लगे रहते हो। तुमने जगत के लोगों के हित के लिए “आख़िर शिवतत्व है क्या?” बहुत उत्तम बात पूछी है। जिसके सुनने से मनुष्य के सब जन्मों…

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सचेतन 139 : श्री शिव पुराण- चंपा और केवड़े के फूलों से शिव पूजन नहीं करना चाहिए।

गलत नीतियों से पूजा नहीं करनी चाहिए  माना जाता है कि एक बार नारद मुनि को पता चला की एक ब्राह्मण ने अपनी बुरी इच्छाओं के लिए चंपा के फूल तोड़े और जब नारद मुनि के वृक्ष्र से पूछा कि क्या किसी ने उसके फूलों को तोड़ा है तो पेड़ ने इससे इनकार कर दिया।…

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सचेतन 138 : श्री शिव पुराण- पुष्पों द्वारा शिव पूजा का माहात्म्य

ऋषियों ने पूछा :– हे महाभाग ! अब आप यह बताइए कि भगवान शिवजी की किन-किन फूलों से पूजा करनी चाहिए? विभिन्न फूलों से पूजा करने पर क्या-क्या फल प्राप्त होते हैं?  सूत जी बोले :- हे ऋषियो! यही प्रश्न नारद जी ने ब्रह्माजी से किया था। ब्रह्माजी ने उन्हें पुष्पों द्वारा शिवजी की पूजा…

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सचेतन 137 : श्री शिव पुराण- महादेव स्वरूप बुद्धि, दृष्टि और ज्ञान का अद्भुत मिलन है।

शिव तत्व मन के परे है। महादेव स्वरूप में शिव चन्द्र समान हैं। चन्द्र लिंग, यानी चन्द्र- गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के वेरावल बंदरगाह में स्थित सोमनाथ का मंदिर चंद्र से संबंधित ही है। पश्चिम बंगाल में चंद्रनाथ लिंग चटागाव शहर से 34 मील दूर पश्चिम बंगाल में स्थित है। कई पवित्र तीर्थ इस क्षेत्र…

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सचेतन 136 : श्री शिव पुराण- ‘ईशान’ सम्पूर्ण सिद्धियों का परिचायक है

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सचेतन 135 : श्री शिव पुराण- पशुपति मंदिर की कथा

योगी शिव और शून्यता पशुपति शैववाद सबसे पुराने शैव संप्रदायों में से एक है, जिसका नाम पशुपति से लिया गया है । संप्रदाय पशुपति को “सर्वोच्च देवता, सभी आत्माओं का स्वामी और सभी अस्तित्व का कारण” मानता है। पशुपति मंदिर बागमती नदी के किनारे पर देवपाटन नामक गाँव में स्थित है। यह मंदिर भगवान शिव…