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सचेतन 258: शिवपुराण- वायवीय संहिता – भाव योग जीवन ऊर्जा को रूपांतरित कर देता है

करुण रस में हृदय द्रवित हो जाता है  हम बात कर रहे थे की अध्यात्म यानी एक ऐसी प्रक्रिया जो जीवन और मृत्यु के बारे में नहीं होती यह आध्यात्मिक प्रक्रिया आपके बारे में होती है, जो कि न तो जीवन है और न ही मृत्यु। अगर इसे आसान शब्दों में कहा जाए तो इस…