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सचेतन 243: शिवपुराण- वायवीय संहिता – महर्षि वाल्मीकि का मंत्रयोग

रत्नाकर “मरा मरा” का उच्चारण और तपस्या में लीन हो कर ब्रह्माजी का दर्शन किए और वाल्मीकि बिन गये  पौराणिक कथा के अनुसार महर्षि वाल्मीकि का मूल नाम रत्नाकर था। उनके पिता ब्रह्माजी के मानस पुत्र प्रचेता थे। प्रचेता का अर्थ है की जो संवेदनाओं के रूप में सक्रिय इंद्रियों के विकास के माध्यम से…