Tag: योगक्षेमं वहाम्यहम् आपका हरेक कर्म इस सृष्टि में शून्यता से ही प्रारंभ होता है

  • सचेतन 261: शिवपुराण- वायवीय संहिता – योगक्षेमं वहाम्यहम्

    आपका हरेक कर्म इस सृष्टि में शून्यता से ही प्रारंभ होता है। ‘शिव’ का अर्थ है शून्य, ‘शिव’ यानी ‘जो नहीं है’। एक बार अपने शून्य होने की सहनशीलता को सक्षम करके देखिए आपको लगेगा की आपका हरेक कर्म इस सृष्टि में शून्यता से ही प्रारंभ होता है। अगर जीवन में यह जान पाये तो…