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सचेतन 255: शिवपुराण- वायवीय संहिता – योग वर्णन

सविषय ध्यान सूर्य किरणों को आश्रय देने वाला होता है और निर्विषय ध्यान अपनी बुद्धि के विस्तार से होते हैं। उपमन्यु बोले; हे केशव ! त्रिलोकीनाथ भगवान शिव का सभी योगी-मुनि ध्यान करते हैं। इसी के द्वारा सिद्धियां प्राप्त होती हैं। सविषय और निर्विषय आदि ध्यान कहे गए हैं। निर्विषय ध्यान करने वाले अपनी बुद्धि…