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सचेतन 2.18: रामायण कथा: सुन्दरकाण्ड – सुरसा ने अपने मुँह का विस्तार सौ योजन का किया था

सूर्य सिद्धान्त में 1 योजन 8 किलोमीटर के बराबर होता है  देवताओं द्वारा हनुमान जी के बल और पराक्रम की परीक्षा लेने की इक्षा को  सत्कारपूर्वक देवी सुरसा ने स्वीकार किया और समुद्र के बीच में राक्षसी का रूप धारण किया। वह समुद्र के पार जाते हुए हनुमान् जी को घेरकर उनसे इस प्रकार बोली-…