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सचेतन 2.26: रामायण कथा: सुन्दरकाण्ड – सोच-विचार करने से निरपेक्ष सत्य की स्वानुभूति होती है, वही ज्ञान है

देवताओं और असुरों के लिये भी दुर्जय जैसी लंकापुरी को देखकर हनुमान जी भी विचार करने लगे।  हमने अबतक यह समझा की अवलोकन या निरीक्षण करने से विज्ञान उपजता है और यही  तथ्य और परिकल्पना हनुमान जी को भी लग रह था जब वे विश्वकर्मा की बनायी हुई लंका को एक सुन्दरी स्त्री के तरह…