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सचेतन 2.102 : रामायण कथा: सुन्दरकाण्ड – राक्षसों द्वारा हनुमान जी की पूँछ में आग लगाना और उनका प्रतिकार

हनुमान जी और लंका में पूंछ में आग की कथा नमस्कार दोस्तों, स्वागत है आपका “धार्मिक कथाएँ” सचेतन के इस विचार के सत्र में। आज हम आपको सुनाने जा रहे हैं रामायण की एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक कथा – “राक्षसों द्वारा हनुमान जी की पूँछ में आग लगाना और उनका प्रतिकार।” तो चलिए, इस रोचक…

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सचेतन 2.100 : रामायण कथा: सुन्दरकाण्ड – रावण की प्रतिक्रिया और हनुमान जी की अंतिम चेतावनी

“धर्म युद्ध की गाथा: हनुमानजी का पराक्रम” नमस्कार श्रोताओं! स्वागत है आपका “धर्मयुद्ध की कहानियाँ” के तीसरे पड़ाव पर इस सचेतन के विचार के सत्र में। पिछले एपिसोड में हमने सुना कि हनुमान जी ने रावण को श्रीराम का पराक्रम और उनकी धर्मनिष्ठा के बारे में बताया। आज के एपिसोड में हम सुनेंगे कि रावण…

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सचेतन 2.99 : रामायण कथा: सुन्दरकाण्ड – सुग्रीव का संदेश लेकर हनुमान जी लंका पहुँचे।

“धर्म युद्ध की गाथा: हनुमानजी का पराक्रम” नमस्कार श्रोताओं! स्वागत है आपका “धर्मयुद्ध की कहानियाँ” के एक और सचेतन के इस विचार के सत्र में।आज हम सुनेंगे उस अद्वितीय क्षण की कहानी जब महाबली हनुमान जी ने राक्षसराज रावण को श्रीराम के प्रभाव का वर्णन किया। तो चलिए, शुरू करते हैं। हनुमान जी, जो वानरों…

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सचेतन 2.98  : रामायण कथा: सुन्दरकाण्ड – रावण का प्रहस्त के द्वारा हनुमान जी से लंका में आने का कारण पूछना और हनुमान् का अपने को श्रीराम का दूत बताना

“धर्म युद्ध की गाथा: हनुमानजी का पराक्रम” नमस्कार श्रोताओं! स्वागत है आपका हमारे सचेतन के इस विचार के सत्र “धर्मयुद्ध की कहानियाँ” में। आज की कहानी है ‘रावण का प्रहस्त के द्वारा हनुमान जी से लंका में आने का कारण पूछना और हनुमान् का अपने को श्रीराम का दूत बताना’। यह कहानी महात्मा हनुमान जी…

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सचेतन 2.94 : रामायण कथा: सुन्दरकाण्ड – रावणपुत्र अक्षकुमार का पराक्रम और वध

“धर्म युद्ध की गाथा: हनुमानजी का पराक्रम” नमस्कार श्रोताओं! स्वागत है आपका हमारे इस सचेतन के विचार के सत्र “धर्मयुद्ध की कहानियाँ” में। आज की हमारी कहानी है ‘रावणपुत्र अक्षकुमार का पराक्रम और वध’। यह कहानी महात्मा हनुमान जी और रावण के वीर पुत्र अक्षकुमार के अद्वितीय संघर्ष की है। आइए, सुनते हैं यह रोमांचक…

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सचेतन 2.89 : रामायण कथा: सुन्दरकाण्ड – हनुमान जी ने घोषणा करते हुए कहा मैं वायु का पुत्र तथा शत्रु सेना का संहार करने वाला हूँ।

राक्षसियाँ, रावण से आगे कहती हैं, ‘प्रमदावन का कोई भी ऐसा भाग नहीं है, जिसको उसने नष्ट न कर डाला हो। केवल वह स्थान, जहाँ जानकी देवी रहती हैं, उसने नष्ट नहीं किया है। जानकीजी की रक्षा के लिये उसने उस स्थान को बचा दिया है या परिश्रम से थककर—यह निश्चित रूप से नहीं जान…