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सचेतन 2.80: रामायण कथा: सुन्दरकाण्ड – हनुमान जी की आत्मकथा

अपने मन में चल रहे विचारों से भय और चिंताओं का सामना करना। कपिवर हनुमान जी ने सीता जी से कहा “आपको पीठ पर बैठाकर मैं समुद्र को लाँघ जाऊँगा।देवि! विदेहनन्दिनि! आप मेरे साथ चलकर लक्ष्मणसहित श्रीरघुनाथजी का शोक दूर कीजिये’’।  सीता मन भरोस तब भयऊ। पुनि लघु रूप पवनसुत लयऊ।  तब ( उसे देखकर…