सचेतन 151 : श्री शिव पुराण- राजसी शक्ति अनियंत्रित ऊर्जा का रूप है

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सचेतन 151 : श्री शिव पुराण- राजसी शक्ति अनियंत्रित ऊर्जा का रूप है

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राजसी शक्ति आपके अंदर ६ प्रकार के स्वभाव को विकसित करते हैं- असुर, राक्षस, पिशाचिका, सर्प, प्रेत, शकुन!

सात्विक शक्ति से आपका स्वभाव अपने आप सकारात्मक हो जाएगा, आप ख़ुद बख़ुद उदार, दयालु, खुले, निष्पक्ष और माफ कर देने वाले स्वभाव के बन जाएँगे। अपनी खुशी-खुशी और हर वो चीज को बांटने लगेंगे जो कुछ भी आपके पास है और आप ऐसा करना पसंद करेंगे, और देने के बदले आप किसी चीज़ की उम्मीद नहीं करते। सात्विक लोग जीवन को एक अनुभव के तौर पर देखते हैं जिससे वो कुछ अच्छा सीख सकें, और वो पद का कभी घमंड नहीं करते, ना ही ईर्ष्या करते हैं।

राजसी शक्ति- लक्ष्यहीन कर्म और जुनून पर केंद्रित है। 

राजसी शक्ति अनियंत्रित ऊर्जा का रूप है, और यह ऊर्जा आप अपने आस पास को नियंत्रण में करने में उस परिस्थिति या व्यक्ति या वातावरण को आप अपने वश में करना चाहते हैं और उन पर आप हावी होने की कोशिश करते हैं। राजसी शक्ति  से हमेंशा आपके बुद्धि को मध्यम कर देता है और यहाँ तक की आपके याददाश्त को भी कमजोर बना देता है। राजसी शक्ति के कारण आप में राजसिक गुण विकसित होता है जिससे आपकी प्रतिष्ठा बढ़ाने का और शासन करने की जागरूकता आप में बढ़ जाती है आप इसे ही बहुत महत्व देते हैं। आपको अपने पद, ख्याति, शक्ति, पैसा और रुतबे को हासिल करने की होड़ लगी रहती है। 

राजसी शक्ति जैसे जैसे आप में विकसित होती है वैसे वैसे ही आपके स्वभाव में अपने पद और संपत्ति से संतुष्ट कम होती जाती है – राजसी लोग और ज्यादा पाने और जो है उसका दिखावा करने की तलाश में रहते हैं । इसके अलावा, ये हमेशा अपनी इच्छाओं की संतुष्टि चाहते हैं, जैसे कि शारीरिक सुख, भोजन, संगीत, रंग, सुगंध, और मनोरंजन, लेकिन ये लोग इन सब चीजों से भी बहुत जल्दी ऊब जाते हैं।

राजसिक स्वभाव के लोग बहुत मुश्किल से बिना मतलब के किसी के लिए कुछ करते हैं। ये जो भी करते हैं उसके पीछे हमेशा कोई मंशा होती है या कोई उम्मीद छिपी होती है, ये परोपकार करने के बजाय उदारता का दिखावा करते हैं।

ये रिश्ते आपसी हित और सम्मान के लिए नहीं, बल्कि अपनी जरूरतों और इच्छाओं की पूर्ति के हिसाब से ही बनाते हैं। सोते वक्त भी इनके दिमाग में ख्य़ाल चलते रहते हैं जिसकी वजह से इनकी नींद पूरी नहीं हो पाती और ये तरोताजा महसूस नहीं करते। ये लोग मसालेदार, गर्म और नमकीन खाना पसंद करते हैं। ये कॉफी, चाय, शराब और तंबाकू जैसी चीज़ों का सेवन रोज़ाना करते हैं।

राजसी शक्ति आपके अंदर ६ प्रकार के स्वभाव विकसित हो जाते हैं- 

असुर- इस स्वभाव के लोग अपनी उपलब्धियों और संपत्ति पर बहुत घमंड करते हैं, खुद ही अपनी तारीफ करते हैं, बहादुर लेकिन निर्दयी होते हैं

राक्षस- इस स्वभाव के लोग क्रूर, बर्दाश्त ना करने वाले, बहुत ज्यादा खाने-पीने और सोने वाले होते हैं

पिशाचिका- इस स्वभाव के लोग अशुद्ध, समय और खाने की परवाह न करने वाले, विपरीत लिंग को लेकर कामुक होते हैं।

सर्प – इस स्वभाव के लोग डरपोक, कायर, धूर्त, दूसरो से जलने वाले होते हैं

प्रेत – इस स्वभाव के लोग लालची, कपटी, होते हैं, इनके अंदर विवेक की कमी होती है

शकुन- इस स्वभाव के लोग भावुक,अधीर, निर्दयी होते हैं और इन्हें बहुत भूख लगती है।

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