नमस्कार,मैं आपका स्वागत करता हूँ सचेतन की इस कड़ी में। आज हम बात करेंगे—विवेक, यानी वह आंतरिक प्रकाश जो हमें दिखाता है किजीवन में क्या वास्तव में हमारा हैऔर क्या केवल कुछ समय के लिए आया हुआ अतिथि। 1. विवेक क्या है? विवेक का अर्थ है—जीवन में होने वाली हर घटना, हर संबंध, हर वस्तु […]
Category: Manushyat-मनुष्यत
सचेतन- 41 वेदांत सूत्र: “मोक्ष: जीते-जी मुक्त होने का आनंद”
सचेतन- 41 वेदांत सूत्र: “मोक्ष: जीते-जी मुक्त होने का आनंद”(The Joy of Realizing Oneness) नमस्कार दोस्तों 🌸स्वागत है “जीवन के सूत्र” में।आज हम बात करेंगे वेदांत के चौथे अध्याय — फल अध्याय — की,जहाँ एक साधक की साधना का अंतिम फल बताया गया है। वह फल है — जीव और ब्रह्म की एकता का अनुभव,और […]
सचेतन- 40 वेदांत सूत्र: “साधना का मार्ग – जीवन को पूजा बनाना”
सचेतन- 40 वेदांत सूत्र: “साधना का मार्ग – जीवन को पूजा बनाना” (How Practice Turns Life into Meditation) नमस्कार दोस्तों 🌸स्वागत है “जीवन के सूत्र” में।आज हम बात करेंगे वेदांत के तीसरे अध्याय की —साधन अध्याय, यानी साधना का मार्ग। वेदांत कहता है — “सच्चा ज्ञान केवल पढ़ने या सुनने से नहीं,बल्कि जीने से आता […]
सचेतन- 39 वेदांत सूत्र: विरोध नहीं, समन्वय करो
(जीवन में एकता और समझदारी का सूत्र) नमस्कार दोस्तों 🌸स्वागत है “जीवन के सूत्र” में।आज हम बात करेंगे वेदांत के दूसरे अध्याय की —अविरोध अध्याय, यानी विरोधों का समाधान। यह अध्याय सिखाता है कि — “विरोध नहीं, समन्वय करो।” वेदांत कहता है —भले ही रास्ते अलग हों — सांख्य, योग, न्याय या वैशेषिक —पर मंज़िल […]
सचेतन- 37 वेदांत सूत्र: चार अध्यायों में जीवन का मार्ग
वेदांत सूत्र कुल चार अध्यायों में विभाजित है।ये चारों अध्याय केवल दर्शन नहीं बताते, बल्कि जीवन के चार कदम सिखाते हैं —ज्ञान से लेकर मुक्ति (आनंद) तक की यात्रा। क्रम अध्याय का नाम विषय जीवन से सम्बन्ध 1️⃣ समाधि / सम्बन्ध अध्याय ब्रह्म का स्वरूप बताता है कि ब्रह्म ही इस जगत का कारण, आधार […]
सचेतन- 36 वेदांत सूत्र: जीवन के सूत्र और वेदांत सूत्र
“जीवन के सूत्र और वेदांत सूत्र” को समझना वास्तव में आत्म-ज्ञान की दिशा में पहला कदम है वेदांत सूत्र क्या है? “वेदांत सूत्र” जिसे “ब्रह्मसूत्र” भी कहा जाता है,भारतीय दर्शन का वह ग्रंथ है जो उपनिषदों की गूढ़ शिक्षाओं कोसंक्षिप्त, तार्किक और व्यवस्थित रूप में समझाता है। इसे महर्षि बादरायण (व्यासजी) ने रचा था।इसमें लगभग […]
सचेतन- 35 तैत्तिरीय उपनिषद् आत्मसंयम और ब्रह्मा
विषय: ब्रह्म ही आनंद है नमस्कार मित्रों,आप सुन रहे हैं “सचेतन यात्रा” —जहाँ हम उपनिषदों की वाणी से जीवन का सार खोजते हैं। आज हम बात करेंगे तैत्तिरीय उपनिषद् की एक अद्भुत वाणी की —“आनंदो ब्रह्मेति व्यजानात्।” अर्थात् — आनंद ही ब्रह्म है। हम सब जीवन में आनंद चाहते हैं —कभी वस्तुओं में, कभी लोगों […]
सचेतन- 34 तैत्तिरीय उपनिषद् आत्मसंयम और ब्रह्मा
विषय: आत्मसंयम — भीतर की शक्ति नमस्कार दोस्तों!आप सुन रहे हैं “सचेतन यात्रा” — जहाँ हम उपनिषदों की गहराई से जीवन के सरल सत्य खोजते हैं।आज का विषय है — “आत्मसंयम — भीतर की शक्ति।” क्या आपने कभी सोचा है कि हमारी ज़िंदगी की सबसे बड़ी लड़ाई कहाँ होती है?कहीं बाहर नहीं… बल्कि अपने ही […]
सचेतन- 33 तैत्तिरीय उपनिषद् आत्मसंयम और ब्रह्मा
नमस्कार मित्रों,आज हम बात करेंगे उपनिषदों के तीन अमूल्य रत्नों की —सत्य, आत्मसंयम, और आनंद की।ये तीनों हमारे जीवन को भीतर से उजाला देते हैं।उपनिषद् हमें बताते हैं —सच्चा सुख न बाहर है, न वस्तुओं में,बल्कि हमारे भीतर की शांति और सत्य में है। 1. सत्य — जीवन का दीपक उपनिषद् कहते हैं — “सत्यमेव […]
सचेतन- 32 : तैत्तिरीय उपनिषद् आनंद का क्रम — भीतर के सुख की यात्रा
नमस्कार मित्रों,आज हम बात करेंगे “आनंद के क्रम” की —यानी सुख से लेकर ब्रह्मानंद तक की यात्रा।यह सुंदर विचार हमें तैत्तिरीय उपनिषद् से मिलता है।उपनिषद् हमें सिखाता है —सच्चा आनंद बाहर नहीं, हमारे भीतर है।चलो, इसे बहुत सरल तरीके से समझते हैं। 1. मानव आनंद (मानुष आनंद) सबसे पहले आता है मानव आनंद —यानी हमारे […]
