0 Comments

सचेतन- 07: शरीर, चक्र और पंचमहाभूत – योग की शक्ति को जानें

नमस्कारआप सुन रहे हैं सचेतन जहाँ हम “आत्मा की आवाज़” — पर विचार रखते हैं जो आपको प्रकृति, योग और आत्म-ज्ञान, आत्म-उन्नयन से जोड़ता है।आज का विषय है — पंचमहाभूत और उनके संबंधित चक्र और मुद्रा।क्या आप जानते हैं कि हमारा शरीर पाँच मूलभूत तत्वों से बना है?और हर तत्व हमारे शरीर के एक खास […]

0 Comments

सचेतन- 06: हमारा शरीर, हमारा मन, और पूरी यह सृष्टि का आधार है पंचभूत 🔱

पंचभूत क्रिया एक योगिक प्रक्रिया है जिसमें साधक या योगी इन पाँच तत्वों के साथ अपने भीतर संतुलन स्थापित करता है। यह क्रिया विशेष रूप से तप, साधना, ध्यान और आंतरिक जागरण के लिए की जाती है। हमारा शरीर, हमारा मन, और पूरी यह सृष्टि — पाँच तत्वों से बनी है:पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और […]

0 Comments

सचेतन- 04: “ज्ञान योग: जब जीवन परीक्षा लेता है”

नमस्कार प्यारे साथियों, आप सुन रहे हैं सचेतन जहाँ हम “आत्मा की आवाज़” पर विचार करते हैं जो आपको जीवन, योग और आत्म-ज्ञान की ओर ले जाता है।ज्ञान योग में जीवन की परीक्षा का क्या अर्थ है, और हम उसका अभ्यास कैसे करें। क्या है ज्ञान योग?  ज्ञान योग यानी ज्ञान का मार्ग —वह रास्ता […]

0 Comments

सचेतन- बुद्धचरितम् 32 बुद्ध के दस पवित्र स्तूपों की कथा

जब भगवान बुद्ध का महापरिनिर्वाण हुआ, तो उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया। उनकी अस्थियों (धातु), भस्म और कलश को सम्मानपूर्वक कई भागों में विभाजित किया गया। इन पवित्र अवशेषों को विभिन्न स्थानों पर श्रद्धा और भक्ति से स्थापित किया गया। इस प्रकार पृथ्वी पर कुल दस पवित्र स्तूपों का निर्माण हुआ। अब […]

0 Comments

सचेतन- बुद्धचरितम् 31 महात्मा बुद्ध का अंतिम सम्मान

जब महात्मा बुद्ध ने संसार से विदा ली और सदा के लिए शांत हो गए, तब उनके भक्तों और अनुयायियों को बहुत दुख हुआ। मल्ल वंश के लोगों ने उनके पार्थिव शरीर को बड़े आदर के साथ सोने की पालकी (स्वर्णमयी शिविका) में रखा। वे पालकी को अपने कंधों पर उठाकर नगर के मुख्य द्वार […]

0 Comments

सचेतन- बुद्धचरितम् 30 बुद्ध का अंतिम उपदेश और निर्वाण

सुभद्र की भक्ति और बुद्ध का आशीर्वाद बुद्ध के निर्वाण के अंतिम समय में एक त्रिदण्डी मुनि, सुभद्र, उनसे मिलने आए। आनन्द के संकोच के बावजूद, बुद्ध ने उन्हें आने दिया और करुणा से धर्म का मार्ग समझाया — एक ऐसा मार्ग जो दुखों से मुक्ति दिलाता है और निर्वाण तक पहुँचाता है। दुख से […]

0 Comments

सचेतन- बुद्धचरितम् 29 छब्बीसवाँ सर्ग : दुख से मुक्ति

बुद्ध के निर्वाण के अंतिम समय की बात है। एक त्रिदण्डी मुनि जिसका नाम सुभद्र था, वह बुद्ध को देखने और उनसे मिलने आया। वह बुद्ध से धर्म के बारे में जानना चाहता था, लेकिन उनके प्रमुख शिष्य आनन्द को यह चिंता थी कि शायद सुभद्र धर्म के बहाने वाद-विवाद करेगा, इसलिए उन्होंने उसे मिलने […]

0 Comments

सचेतन- बुद्धचरितम् 28 पच्चीसवाँ सर्ग प्रेम और शांति से विदाई

जब महात्मा बुद्ध ने निर्वाण (मोक्ष) की इच्छा से वैशाली नगर को छोड़ने का निश्चय किया, तब वहां के लोगों का दिल भर आया। लिच्छवि राजा सिंह और नगर के अनेक लोग गहरे दुःख में डूब गए। राजा सिंह ने बहुत विलाप किया, आँखों में आँसू भर आए। यह क्षण बुद्ध के जीवन का अत्यंत […]

0 Comments

सचेतन- बुद्धचरितम् 26 बुद्ध का तत्वज्ञान

दुखों से छुटकारा पाने के लिए अष्टांगिक मार्ग (Eightfold Path): यह आठ साधन हैं, जिनसे जीवन में शुद्धि और मुक्ति प्राप्त होती है: सरल शब्दों में निष्कर्ष: जन्म, बुढ़ापा और मृत्यु जैसे दुःख जीवन का स्वाभाविक हिस्सा हैं,परंतु बुद्ध ने सिखाया कि इच्छाओं को त्यागकर, सदाचारी जीवन अपनाकर और गहरे ध्यान द्वारा आत्मा को शुद्ध […]

0 Comments

सचेतन- बुद्धचरितम् 25- तेइसवाँ सर्ग बुद्ध और आम्रपाली

जब भगवान बुद्ध आम्रपाली के घर पधार गए, तो यह समाचार पूरे वैशाली नगर में फैल गया। लिच्छवि वंश के राजा और उनके साथी यह सुनकर बहुत उत्साहित हुए कि बुद्ध उनके नगर में हैं। वे सभी तुरंत बुद्ध के दर्शन करने आम्रपाली के निवास पर पहुँच गए। आम्रपाली का जन्म और प्रारंभिक जीवन: कहा […]