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सचेतन- 11: समझदारी (Wisdom) – अनुभव और विवेक का मेल

जब मन स्थिर होता है, तब विज्ञान जाग्रत होता है — और जब विज्ञान शुद्ध होता है, तब प्रज्ञा (आत्मिक बोध) प्रकट होती है। “जब मन स्थिर होता है…” 👉 यानी जब मन चंचलता छोड़कर शांत और एकाग्र होता है, तब वह इंद्रियों से मिली जानकारियों को सही तरह से ग्रहण कर सकता है। “…तब […]

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सचेतन- 2: सुनने मात्र से चेतना की जागृति का मार्ग

चेतना को जानने के तीन मार्ग 1. श्रवण (Shravanam) – “सुनना और ग्रहण करना” परिभाषा: श्रवण का अर्थ है – गुरु या आचार्य से वेद, उपनिषद, भगवद्गीता जैसे शास्त्रों का ज्ञान श्रद्धा और ध्यानपूर्वक सुनना। महत्व: कैसे करें: कहानी: अर्जुन का श्रवण – समर्पण से ज्ञान की ओर कुरुक्षेत्र का मैदान युद्ध के लिए तैयार […]

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सचेतन- 10: शेष – अनुभव वह पुल है, जो चेतना को वास्तविकता से जोड़ता है,

बहुत ही गूढ़ और सुंदर विचार है: “अनुभव वह पुल है, जो चेतना को वास्तविकता से जोड़ता है।” इस पंक्ति को हम नीचे कुछ भावपूर्ण और सरल तरीकों से समझ सकते हैं: 🌉 भावार्थ: चेतना (Consciousness) — वह अनदेखी शक्ति है जो हमें सोचने, समझने, महसूस करने और जानने की क्षमता देती है।वास्तविकता (Reality) — […]

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सचेतन- 09: शेष – हमारी चेतना अनंत है, परंतु अनुभव सीमित

“शेष – जो बचा रह गया” नमस्कार दोस्तों,हम एक गहरे, बहुत ही सूक्ष्म विषय की बात पर पिछले दिनों चर्चा जारी किए थे — “शेष”, यानी वह जो बचा रह जाता है। वह जो हमारी सोच से परे है, अनुभव से बाहर, पर फिर भी हमारे भीतर है। हमारी यात्रा एक प्राचीन वैदिक श्लोक से […]

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सचेतन 3.10 : नाद योग: ॐ की बारह कलाएँ और उनका महत्व

नमस्कार श्रोताओं, और स्वागत है इस हमारे विशेष नाद योग (योग विद्या) पर सचेतन के इस विचार के सत्र  में “असंख्य नाद” के एक और रोचक विचार के सत्र में।  ॐ की चार मात्राएँ और बारह कलाएँ नाद योग का मूल तत्व हैं। यह ध्वनि हमें आत्म-साक्षात्कार और मोक्ष की दिशा में ले जाती है। […]