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सचेतन- 14:  आत्मबोध की यात्रा – जब आप सोते हैं, तब आप क्या होते हैं?

“कल रात आप सोए थे…ना कोई विचार था,ना कोई चिंता,ना कोई डर,ना कोई पहचान। लेकिन सुबह उठकर आपने कहा—‘मैं बहुत अच्छी नींद सोया।’ अब ज़रा सोचिए—जब सब कुछ सो गया था,तब यह ‘मैं’ कौन था जो नींद का अनुभव कर रहा था?” अनाद्यविद्यानिर्वाच्या कारणोपाधिरुच्यते। उपाधित्रितयादन्यमात्मानमवधारयेत्॥ बहुत सरल अर्थ  जो अज्ञानशुरुआत से चला आ रहा है,जिसे […]

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सचेतन: ज्ञान योग-6: माया की भूमिका

माया एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ होता है ‘जो नहीं है’ या ‘भ्रम’। अद्वैत वेदांत के अनुसार, ब्रह्म ही सत्य है, जो कि एक अनंत, अव्यक्त, और निराकार सत्ता है। माया उस पर्दे की तरह है जो ब्रह्म और जीवात्मा के बीच में होती है, जिससे जीवात्मा खुद को ब्रह्म से अलग और भिन्न […]