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सचेतन- 31 – जो टूटने वाला है, वह आप नहीं हो सकते

क्या आपको कभी ऐसा लगता है कि आपके अपने ही विचारआपको इधर-उधर पटकते रहते हैं? कभी डर,कभी चिंता,कभी भविष्य की टेंशन,तो कभी अतीत की यादें। मन जैसे एक तूफ़ान बन जाता है। लेकिन अगर मैं आपसे कहूँ किइस तूफ़ान के बीच भीएक ऐसी जगह हैजहाँ पूरी शांति है? आत्मबोध का यह प्रसंगयही जगह दिखाता है। […]

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सचेतन- 30 – अहंकार का जन्म

(Ātmabodha Verse 30: The Birth of the Ego) आपने अहंकार के बारे में बहुत कुछ सुना होगा।कभी कहा जाता है—“ईगो छोड़ो।”“अहंकार को मारो।”“ईगो सबसे बड़ी समस्या है।” लेकिन ज़रा एक पल रुककर सोचिए— अगर अहंकार से लड़ना हीअहंकार को और मज़बूत कर देता हो तो? अगर अहंकार कोई दुश्मन नहीं,बल्कि एक गलत पहचान हो? आत्मबोध […]

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सचेतन- 25 सबसे बड़ा झूठ जो आप रोज़ खुद से बोलते हैं

क्या आप जानते हैंकि आप हर दिन खुद से एक झूठ बोलते हैं? एक ऐसा झूठजो आपको समझदार, स्मार्टऔर कंट्रोल में महसूस कराता है— लेकिन असल मेंयही झूठआपके ज़्यादातर दुखों और संघर्षों की जड़ है। और वो झूठ है— “मैं जानता हूँ।” …. ये तीन छोटे शब्दबहुत मामूली लगते हैं, है न? लेकिन क्या आपने […]

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सचेतन:बुद्धचरितम्-17 आराडदर्शन

गौतम बुद्ध की ज्ञान प्राप्ति की ओर यात्रा गौतम बुद्ध, जो इक्ष्वाकु वंश के तेजस्वी राजकुमार थे, सत्य की खोज में निकल पड़े थे। वे पहले अराड मुनि के आश्रम पहुँचे। मुनि ने उनका प्रेमपूर्वक स्वागत किया और उन्हें आदर से आसन दिया। उन्होंने कहा, “शास्त्र का उपदेश देने से पहले मैं आमतौर पर शिष्य […]