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सचेतन- 09:  आत्मबोध की यात्रा – “सब एक ही सत्य से बने हैं”

“कभी आपने सोचा है—हम सब इतने अलग क्यों दिखते हैं? कोई अमीर, कोई गरीब…कोई मनुष्य, कोई पशु…कोई देव, कोई साधारण… लेकिन अगर भीतर से देखा जाए—तो क्या हम सच में अलग हैं?” सच्चिदात्मन्यनुस्यूते नित्ये विष्णौ प्रकल्पिताः। व्यक्तयो विविधाः सर्वा हाटके कटकादिवत्॥९॥ सरल अर्थ “सच्चिदानंद स्वरूप,सर्वत्र व्याप्त,नित्य ब्रह्म (विष्णु) मेंयह सारी विविध सृष्टिकल्पना से प्रकट हुई […]

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सचेतन- 41 वेदांत सूत्र: “मोक्ष: जीते-जी मुक्त होने का आनंद”

सचेतन- 41 वेदांत सूत्र: “मोक्ष: जीते-जी मुक्त होने का आनंद”(The Joy of Realizing Oneness)  नमस्कार दोस्तों 🌸स्वागत है “जीवन के सूत्र” में।आज हम बात करेंगे वेदांत के चौथे अध्याय — फल अध्याय — की,जहाँ एक साधक की साधना का अंतिम फल बताया गया है। वह फल है — जीव और ब्रह्म की एकता का अनुभव,और […]

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सचेतन 3.41 : नाद योग: आंतरिक आनंद का महत्व

आंतरिक आनंद का वास्तविक अर्थ नमस्कार दोस्तों! स्वागत है आपके पसंदीदा “सचेतन” कार्यक्रम में। आज हम चर्चा करेंगे आंतरिक आनंद के गहरे महत्व पर। इसे समझने के लिए एक प्राचीन कथा के माध्यम से जानेंगे कि वास्तविक आनंद कहाँ छिपा है और इसे प्राप्त करने के लिए हमें किस दिशा में यात्रा करनी चाहिए। आइए, […]

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सचेतन 3.10 : नाद योग: ॐ की बारह कलाएँ और उनका महत्व

नमस्कार श्रोताओं, और स्वागत है इस हमारे विशेष नाद योग (योग विद्या) पर सचेतन के इस विचार के सत्र  में “असंख्य नाद” के एक और रोचक विचार के सत्र में।  ॐ की चार मात्राएँ और बारह कलाएँ नाद योग का मूल तत्व हैं। यह ध्वनि हमें आत्म-साक्षात्कार और मोक्ष की दिशा में ले जाती है। […]