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सचेतन 249: शिवपुराण- वायवीय संहिता – पंचकोश मानव का अस्तित्व है 

स्पर्श योग में आपका रूपांतरण भी एक आयाम है, जो संभव है!  योग की धारणा के अनुसार मानव का अस्तित्व पाँच भागों में बंटा है जिन्हें पंचकोश कहते हैं या यूँ कहें की ये पाँच आवरण या परत है। ये कोश एक साथ विद्यमान अस्तित्व के विभिन्न तल समान होते हैं। विभिन्न कोशों में चेतन,…