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सचेतन 3.34 : नाद योग: तुरीय अवस्था का आध्यात्मिक महत्व

नमस्कार दोस्तों! स्वागत है आपका “सचेतन” कार्यक्रम में। आज हम चर्चा करेंगे “तुरीय अवस्था” के आध्यात्मिक महत्व पर। यह वह अवस्था है, जो जाग्रत, स्वप्न, और सुषुप्ति अवस्थाओं से परे है। तुरीय अवस्था शुद्ध चेतना की वह उच्चतम अवस्था है, जिसे आत्म-साक्षात्कार के लिए आवश्यक माना जाता है। आइए, इस अवस्था के आध्यात्मिक पहलुओं को […]

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सचेतन 3.33 : नाद योग: तुरीय अवस्था: शुद्ध चेतना की अंतिम अवस्था

नमस्कार दोस्तों! स्वागत है आपका हमारे इस खास सचेतन के विचार सत्र में। और आज हम चर्चा करेंगे एक अत्यंत गहन और आध्यात्मिक विषय पर, जिसे “तुरीय अवस्था” कहा जाता है। यह वह अवस्था है जहाँ आत्मा शुद्ध चेतना में प्रवेश करती है और परमात्मा के साथ एकत्व का अनुभव करती है। तो आइए, जानते […]

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सचेतन 3.32 : नाद योग: चार अवस्थाएँ: आत्मा के अनुभव का सफर

नमस्कार दोस्तों! स्वागत है आपका “सचेतन” कार्यक्रम में। और आज हम आत्मा के चार प्रमुख अनुभवों पर चर्चा करेंगे, जिन्हें चार अवस्थाएँ कहा जाता है। यह एक महत्वपूर्ण विषय है, जो हमें आत्मा के विभिन्न अनुभवों के माध्यम से जीवन के गहरे अर्थ को समझने में मदद करता है। चार अवस्थाएँ: आत्मा का सफर आत्मा […]