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सचेतन- 38 –आत्मबोध – साधना से साक्षात्कार की ओर 

“ध्यान कोई तकनीक नहीं, एक परिपक्व स्थिति है” क्या आपने कभी यह महसूस किया है किआप ध्यान करना चाहते हैं,लेकिन मन बैठने को तैयार ही नहीं होता? शरीर बैठ जाता है,आँखें बंद हो जाती हैं,पर मन बाहर ही भटकता रहता है। आत्मबोध में आज का यह विचारहमें एक बहुत स्पष्ट बात सिखाता है— 👉 ध्यान […]

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सचेतन- 35 –आत्मबोध – “मैं आकाश के समान हूँ”

क्या आपने कभी ध्यान दिया है— आपके जीवन मेंलोग आते हैं, जाते हैं…परिस्थितियाँ बदलती हैं…सुख-दुःख आते-जाते रहते हैं… लेकिन फिर भीआपके भीतर कहींकुछ ऐसा हैजो इन सबके बीचबिलकुल शांत बना रहता है? आत्मबोध के आज के विचार में हम बात करेंगे कीयही मौन सत्य की ओर इशारा करता है— “मैं आकाश के समान हूँ।” शंकराचार्य […]

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सचेतन- 34 –आत्मबोध – ध्यान नहीं, पहचान की बात

सचेतन- 34 –आत्मबोध – ध्यान नहीं, पहचान की बात क्या आपने कभी सोचा है—इतना ध्यान करने के बाद भीमन क्यों शांत नहीं होता? क्यों भीतर कहीं यह भावना बनी रहती है—“अभी कुछ और करना बाकी है…अभी मुक्ति दूर है…” आत्मबोध का आज का विचारयहीं एक बहुत गहरी बात कहता है— मुक्ति पाने की ज़रूरत नहीं […]

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सचेतन- 18: ध्यान और मनन (Meditation & Contemplation)

प्रज्ञा केवल ज्ञान नहीं, बल्कि आत्मिक अनुभव है — प्रज्ञा: ज्ञान से आगे, अनुभव की ओर ले जाता है। प्रज्ञा का अर्थ केवल पढ़ा-पढ़ाया हुआ ज्ञान नहीं है।यह वह गूढ़ बुद्धि है जो तब जागती है जब हम ज्ञान को आत्मा में जीते हैं,जब सत्य केवल समझा नहीं जाता — अनुभव किया जाता है।और यह […]

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सचेतन- 5: सत्य पर गहन ध्यान

निदिध्यासन (Nididhyasanam) – “ध्यान और आत्मसात” सुने और समझे हुए ज्ञान को ध्यानपूर्वक आत्मसात करना, अर्थात उस ज्ञान को अपने जीवन और चेतना में पूरी तरह उतारना। निदिध्यासन (Nididhyasana) – सत्य पर गहन ध्यान निदिध्यासन का अर्थ है — किसी सत्य, विचार, मंत्र या उपदेश पर बार-बार, एकाग्र होकर ध्यान करना। यह केवल सोचने भर […]

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सचेतन- 2: सुनने मात्र से चेतना की जागृति का मार्ग

चेतना को जानने के तीन मार्ग 1. श्रवण (Shravanam) – “सुनना और ग्रहण करना” परिभाषा: श्रवण का अर्थ है – गुरु या आचार्य से वेद, उपनिषद, भगवद्गीता जैसे शास्त्रों का ज्ञान श्रद्धा और ध्यानपूर्वक सुनना। महत्व: कैसे करें: कहानी: अर्जुन का श्रवण – समर्पण से ज्ञान की ओर कुरुक्षेत्र का मैदान युद्ध के लिए तैयार […]

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सचेतन 3.36 : नाद योग: हृदयकमल और ॐकार का ध्यान

आत्म-साक्षात्कार की ओर नमस्कार दोस्तों! स्वागत है आपके पसंदीदा पॉडकास्ट “सचेतन” कार्यक्रम में। आज हम चर्चा करेंगे ध्यान की एक अद्वितीय विधि के बारे में—हृदयकमल और ॐकार का ध्यान। यह ध्यान न केवल हमारे मन को शांत करता है, बल्कि हमें आत्म-साक्षात्कार की ओर भी ले जाता है। आइए, जानते हैं इसकी गहराई और महत्व […]

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सचेतन 3.02 : नाद योग: ख़ुशी के लिए नाद योग

सचेतन 3.02 : नाद योग: ख़ुशी के लिए नाद योग अ, ऊ, म ध्वनियों का शरीर पर प्रभाव नमस्कार दोस्तों! स्वागत है आपका हमारे विशेष नाद योग (योग विद्या) पर सचेतन के इस विचार के सत्र  में। आज हम आपको एक ऐसे विषय के बारे में बताएंगे, जिसे जानकर आपकी योग साधना में चार चांद […]

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ध्यान के लाभ

ध्यान क्या है? ध्यान मन को एकाग्र करने और वर्तमान क्षण में लाने की एक प्राचीन कला है। यह एक मानसिक प्रशिक्षण है जो हमें अपने विचारों, भावनाओं और संवेदनाओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद करता है। ध्यान के लाभ: