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सचेतन- 07:  आत्मबोध की यात्रा -“जब तक ब्रह्म नहीं जाना— जगत सत्य लगता है”

“कभी आपने दूर से चमकती हुई कोई चीज़ देखी है…और लगा हो— यह तो चाँदी है? आप पास गए…और पता चला— वह तो सीप थी।चाँदी नहीं। शंकराचार्य कहते हैं—जगत का ‘सत्य’ भी कुछ ऐसा ही है।” तावत्सत्यं जगद्भाति शुक्तिकारजतं यथा। यावन्न ज्ञायते ब्रह्म सर्वाधिष्ठानमद्वयम्॥७॥ “यह जगत तब तक सत्य जैसा प्रतीत होता है,जब तक ब्रह्म— […]

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सचेतन- 38 वेदांत सूत्र: जीवन से सम्बन्ध

स्वागत है “जीवन के सूत्र” में।आज हम बात करेंगे उस सबसे सुंदर शब्द की —“सम्बन्ध”। वेदांत कहता है — “ब्रह्म ही सबका कारण और आधार है।”इसका मतलब है कि हम सब एक ही चेतना से जुड़े हैं —एक अदृश्य सूत्र से, जिसे हम “सम्बन्ध” कहते हैं। एक छोटी सी कहानी है — एक गाँव में […]

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सचेतन- 25:तैत्तिरीय उपनिषद्: परम आनन्द ही ब्रह्म है

“आनन्दो ब्रह्मेति” ✨इसका अर्थ है — परम आनन्द ही ब्रह्म है। तैत्तिरीयोपनिषद् का भाव कि साधक जब अन्न (शरीर), प्राण (जीवन-शक्ति), मन (विचार-भावना) और विज्ञान (विवेक-ज्ञान) की सीमाओं को पार कर लेता है, तब वह पहुँचता है आनन्दमय कोश में।यहीं अनुभव होता है कि — यही अवस्था है — आनन्दो ब्रह्मेति। क्यों कहा गया “आनन्द […]

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सचेतन- 7: आत्मा – चेतना का आधार

🕉️ उपनिषदों के अनुसार ब्रह्म को जानना: 🌟 ब्रह्म को जानने का परिणाम: 📖 एक सरल उदाहरण: जैसे समुद्र की लहरें समुद्र से अलग नहीं होतीं, वैसे ही आत्मा ब्रह्म से अलग नहीं है।ब्रह्म को जानना = यह जानना कि मैं लहर नहीं, मैं स्वयं समुद्र हूँ। 1. अहं ब्रह्मास्मि (Aham Brahmasmi) – मैं ब्रह्म […]

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सचेतन- 2: सुनने मात्र से चेतना की जागृति का मार्ग

चेतना को जानने के तीन मार्ग 1. श्रवण (Shravanam) – “सुनना और ग्रहण करना” परिभाषा: श्रवण का अर्थ है – गुरु या आचार्य से वेद, उपनिषद, भगवद्गीता जैसे शास्त्रों का ज्ञान श्रद्धा और ध्यानपूर्वक सुनना। महत्व: कैसे करें: कहानी: अर्जुन का श्रवण – समर्पण से ज्ञान की ओर कुरुक्षेत्र का मैदान युद्ध के लिए तैयार […]

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सचेतन: ज्ञान योग-6: माया की भूमिका

माया एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ होता है ‘जो नहीं है’ या ‘भ्रम’। अद्वैत वेदांत के अनुसार, ब्रह्म ही सत्य है, जो कि एक अनंत, अव्यक्त, और निराकार सत्ता है। माया उस पर्दे की तरह है जो ब्रह्म और जीवात्मा के बीच में होती है, जिससे जीवात्मा खुद को ब्रह्म से अलग और भिन्न […]

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सचेतन 3.11 : नाद योग: हमारे जीवन की सच्चाई हमें परमपद की ओर अग्रसर करती है

सूक्ष्मतम नाद से जीव, ईश्वर और ब्रह्म की सत्ता का ज्ञान नमस्कार श्रोताओं, और स्वागत है इस हमारे विशेष नाद योग (योग विद्या) पर सचेतन के इस विचार के सत्र  में, जहाँ हम आपको ध्यान योग साधना की गहराइयों में ले चलेंगे। इस दस मिनट के कार्यक्रम में, हम जानेंगे कि किस प्रकार ध्यान योग […]