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सचेतन- 31 – जो टूटने वाला है, वह आप नहीं हो सकते

क्या आपको कभी ऐसा लगता है कि आपके अपने ही विचारआपको इधर-उधर पटकते रहते हैं? कभी डर,कभी चिंता,कभी भविष्य की टेंशन,तो कभी अतीत की यादें। मन जैसे एक तूफ़ान बन जाता है। लेकिन अगर मैं आपसे कहूँ किइस तूफ़ान के बीच भीएक ऐसी जगह हैजहाँ पूरी शांति है? आत्मबोध का यह प्रसंगयही जगह दिखाता है। […]

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सचेतन- 31 : तैत्तिरीय उपनिषद् तप के रूप और आनंद का क्रम

उपनिषद् कहते हैं — “तपसा ब्रह्म विजिज्ञासस्व।”अर्थात्, ब्रह्म को जानने की इच्छा हो तो तप करो — साधना करो। तप (Tapas) का अर्थ केवल कठोर व्रत या शरीर को कष्ट देना नहीं है,बल्कि मन, वाणी और कर्म को एकाग्र कर सत्य की खोज में लगाना है। 🌿 तप के तीन रूप हैं: जब साधक इन […]