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सचेतन- 15:तैत्तिरीय उपनिषद्: ब्रह्मानंदवल्ली-तप, सत्य, और आत्म-संयम

ब्रह्मानंदवल्ली — उस साधक को ब्रह्मानंद (ब्रह्म का आनंद) की अनुभूति तक ले जाती है। तैत्तिरीयोपनिषद् ब्रह्म को केवल जानने की बात नहीं करता, बल्कि ब्रह्म “होने” की बात करता है। और इसका माध्यम है — तप, सत्य, और आत्म-संयम। तैत्तिरीयोपनिषद् में ब्रह्म केवल एक ज्ञान का विषय नहीं है कि हम उसे “जान” लें, […]

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सचेतन- 11: तैत्तिरीयोपनिषद् — आत्मानुभूति और ब्रह्मविद्या का रहस्य

साधना में आत्मानुभूति और ब्रह्मविद्या साधना के मार्ग में आत्मानुभूति मंज़िल है और ब्रह्मविद्या उसका नक्शा। आत्मानुभूति — स्वयं का प्रत्यक्ष साक्षात्कार।यह केवल “मैं कौन हूँ” का उत्तर नहीं, बल्कि गहराई से जिया हुआ अनुभव है कि हम शरीर या मन नहीं, बल्कि शुद्ध, अविनाशी चेतना हैं।जैसे अंधेरे में दीप जलने पर सब स्पष्ट दिखने […]