Tag: योग गति में विघ्न विघ्नों के शांत होने पर उपसर्ग (विशेषता या परिवर्तन) उत्पन्न हो जाते हैं।

  • सचेतन 254: शिवपुराण- वायवीय संहिता – योग गति में विघ्न

    विघ्नों के शांत होने पर उपसर्ग (विशेषता या परिवर्तन) उत्पन्न हो जाते हैं।  उपमन्यु बोले ;- हे केशव! आलस्य, व्याधि, प्रमाद, स्थान, संशय, चित्त का एकाग्र न होना, अश्रद्धा, दुख, वैमनस्य आदि योग में पड़ने वाले विघ्न हैं। इन विघ्नों को सदा शांत करते रहना चाहिए। इन सब विघ्नों के शांत होने पर छः उपसर्ग…