क्या आप जानते हैंकि आप हर दिन खुद से एक झूठ बोलते हैं? एक ऐसा झूठजो आपको समझदार, स्मार्टऔर कंट्रोल में महसूस कराता है— लेकिन असल मेंयही झूठआपके ज़्यादातर दुखों और संघर्षों की जड़ है। और वो झूठ है— “मैं जानता हूँ।” …. ये तीन छोटे शब्दबहुत मामूली लगते हैं, है न? लेकिन क्या आपने […]
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सचेतन- 23: वह प्राचीन पहचान की भूल, जो आपके सारे दुःख की जड़ है
क्या कभी ऐसा लगता हैकि आपका मन ही आपका सबसे बड़ा संघर्ष बन गया है? विचार रुकते नहीं…चिंताएँ पीछा नहीं छोड़तीं…और भीतर एक शोर लगातार चलता रहता है। हम शांति की तलाश मेंकभी रिश्ते बदलते हैं,कभी काम,कभी जगहें। पर भीतर का शोरकुछ देर शांत होकरफिर लौट आता है। तो प्रश्न यह है—गलत क्या है? क्या […]
सचेतन- 18: मैं राजा हूँ, मेरे भीतर सब चल रहा है
क्या आपने कभी उस बेचैनी, उस हल्की-सी घबराहट पर गौर किया है जो हर समय हमारे साथ चलती रहती है? वो एक एहसास कि कुछ तो गड़बड़ है—बाहर की दुनिया में नहीं, बल्कि हमारे अपने अंदर। यह एक खामोश तकलीफ है, सीने में एक तनाव जिसके साथ हम सुबह उठते हैं और बस… उसे पूरे […]
सचेतन- 16: आत्मबोध की यात्रा -आप सिर्फ एक छिलका हैं असली चावल तो अंदर है
आप सोचते हैं कि आप अपने विचारों को कंट्रोल करते हैं, है ना? लेकिन क्या हो, अगर मैं कहूँ कि आपके विचार, आपकी भावनाएँ, और यहाँ तक कि आपका ये शरीर… आप हैं ही नहीं? सुनने में थोड़ा अजीब लगेगा, पर क्या हो अगर वो, जिसे आप ‘मैं’ समझते हैं, वो असल में आप हो […]
सचेतन- 38 वेदांत सूत्र: जीवन से सम्बन्ध
स्वागत है “जीवन के सूत्र” में।आज हम बात करेंगे उस सबसे सुंदर शब्द की —“सम्बन्ध”। वेदांत कहता है — “ब्रह्म ही सबका कारण और आधार है।”इसका मतलब है कि हम सब एक ही चेतना से जुड़े हैं —एक अदृश्य सूत्र से, जिसे हम “सम्बन्ध” कहते हैं। एक छोटी सी कहानी है — एक गाँव में […]
सचेतन: ज्ञान योग-6: माया की भूमिका
माया एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ होता है ‘जो नहीं है’ या ‘भ्रम’। अद्वैत वेदांत के अनुसार, ब्रह्म ही सत्य है, जो कि एक अनंत, अव्यक्त, और निराकार सत्ता है। माया उस पर्दे की तरह है जो ब्रह्म और जीवात्मा के बीच में होती है, जिससे जीवात्मा खुद को ब्रह्म से अलग और भिन्न […]
