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सचेतन- 14:तैत्तिरीय उपनिषद्: शिक्षावल्ली – स्वर, लय और ताल का संतुलन

शिक्षावल्ली तैत्तिरीय उपनिषद् (यजुर्वेद की शाखा) का प्रथम भाग है। “वल्ली” का अर्थ है — लता या शाखा। इसलिए शिक्षावल्ली = वह शाखा जिसमें शिक्षा (उच्चारण, स्वर, लय और पाठ की शुद्धि) के विषय में ज्ञान दिया गया है। शिक्षा में उच्चारण, स्वर, मात्रा और बल की शुद्ध परंपरा।इसके छः अंग (तत्त्व) हैं  शिष्य को […]

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सचेतन- 13:तैत्तिरीय उपनिषद्: शिक्षावल्ली -शुद्ध उच्चारण क्यों आवश्यक है?

शिक्षावल्ली तैत्तिरीय उपनिषद् (यजुर्वेद की शाखा) का प्रथम भाग है। “वल्ली” का अर्थ है — लता या शाखा। इसलिए शिक्षावल्ली = वह शाखा जिसमें शिक्षा (उच्चारण, स्वर, लय और पाठ की शुद्धि) के विषय में ज्ञान दिया गया है। शिक्षा में उच्चारण, स्वर, मात्रा और बल की शुद्ध परंपरा।इसके छः अंग (तत्त्व) हैं  शिष्य को […]

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सचेतन- 11: तैत्तिरीयोपनिषद् — आत्मानुभूति और ब्रह्मविद्या का रहस्य

साधना में आत्मानुभूति और ब्रह्मविद्या साधना के मार्ग में आत्मानुभूति मंज़िल है और ब्रह्मविद्या उसका नक्शा। आत्मानुभूति — स्वयं का प्रत्यक्ष साक्षात्कार।यह केवल “मैं कौन हूँ” का उत्तर नहीं, बल्कि गहराई से जिया हुआ अनुभव है कि हम शरीर या मन नहीं, बल्कि शुद्ध, अविनाशी चेतना हैं।जैसे अंधेरे में दीप जलने पर सब स्पष्ट दिखने […]