#RudraSamhita https://sachetan.org/ ब्रह्माजी ने कहा ;- भगवान शिव की भक्ति सुखमय, निर्मल एवं सनातन रूप है तथा समस्त मनोवांछित फलों को देने वाली है। यह दरिद्रता, रोग, दुख तथा शत्रु द्वारा दी गई पीड़ा का नाश करने वाली है। जब तक मनुष्य भगवान शिव का पूजन नहीं करता और उनकी शरण में नहीं जाता, […]
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सचेतन :73 श्री शिव पुराण- शिव की भक्ति से दरिद्रता, रोग, दुख तथा शत्रु द्वारा दी गई पीड़ा का नाश होता है।
सचेतन :72 श्री शिव पुराण- सगुण और निर्गुण भक्ति धारा
शिवजी सृष्टि, पालन और संहार का कर्ता हैं। उनका स्वरूप सगुण और निर्गुण है! शिवजी स्वयं कहते हैं कि मैं ही सच्चिदानंद निर्विकार परमब्रह्म और परमात्मा हूं। शिवजी की आराधना में निर्गुण भक्ति धारा और भक्त निराकार लिंग स्वरूप की उपासना पर जोर देते हैं। इस युग में भी इस भक्ति धारा के प्रमुख कवियों […]
सचेतन :71 श्री शिव पुराण- ब्रह्मा, विष्णु और रुद्र अपने विराट आयुर्बल के कारण सृष्टि की रचना, रक्षा और प्रलयरूप गुणों को धारण किए हुए हैं।
#RudraSamhita शिवजी सृष्टि, पालन और संहार का कर्ता हैं। उनका स्वरूप सगुण और निर्गुण है! वे ही सच्चिदानंद निर्विकार परमब्रह्म और परमात्मा हैं। सृष्टि की रचना, रक्षा और प्रलयरूप गुणों के कारण शिवजी ही ब्रह्मा, विष्णु और रुद्र नाम धारण कर तीन रूपों में विभक्त हुए हैं। शिवजी भक्तवत्सल और भक्तों की प्रार्थना को सदैव […]
सचेतन :70 श्री शिव पुराण- ब्रह्मा, विष्णु और रुद्र के आयुर्बल
सचेतन :70 श्री शिव पुराण- ब्रह्मा, विष्णु और रुद्र के आयुर्बल #RudraSamhita परमेश्वर शिव जी भगवान विष्णु जी से बोले, हे उत्तम व्रत का पालन करने वाले विष्णु! तुम सर्वदा सब लोकों में पूजनीय और मान्य होंगे। भगवान विष्णु जी को ब्रह्माजी के द्वारा रचे लोक में कोई दुख या संकट होने पर दुखों और […]
सचेतन :69 श्री शिव पुराण- श्रीहरि को सृष्टि की रक्षा का भार मिला है
सचेतन :69 श्री शिव पुराण- श्रीहरि को सृष्टि की रक्षा का भार मिला है #RudraSamhita ‘ॐ तत्वमसि’ महावाक्य के दृष्टिगोचर से हम ब्रह्म को हर जीव, जगत और ईश्वर के बहुत पाते हैं और इस महावाक्य का अर्थ है-‘वह ब्रह्म तुम्हीं हो।’ उसी ब्रह्म को ‘तत्त्वमसि’ कहा गया है। वह शरीर और इन्द्रियों में रहते […]
सचेतन :67 श्री शिव पुराण- ॐ तत्वमसि’ महावाक्य का दृष्टिगोचर शब्द ज्ञान से संभव है
सचेतन :67 श्री शिव पुराण- ॐ तत्वमसि’ महावाक्य का दृष्टिगोचर शब्द ज्ञान से संभव है #RudraSamhita जब आपके आंतरिक शरीर में ऋषि जैसे विशिष्ट व्यक्ति के समान अपकी विलक्षण एकाग्रता हो जाएगा तो उसके बल पर गहन ध्यान में आप विलक्षण शब्दों के दर्शन करके उनके गूढ़ अर्थों को जान सकेंगे। आप स्वयं और मानव […]
सचेतन :66 श्री शिव पुराण- स्वर और व्यंजन की ध्वनि मात्र से महादेव व भगवती उमा के दर्शन।
सचेतन :66 श्री शिव पुराण- स्वर और व्यंजन की ध्वनि मात्र से महादेव व भगवती उमा के दर्शन। #RudraSamhita माना जाता है कि सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड से सदा ॐ की ध्वनी निसृत होती रहती है. हमारी और आपके हर श्वास से ॐ की ही ध्वनि निकलती है. यही हमारे-आपके श्वास की गति को नियंत्रित करता है. […]
सचेतन :65 श्री शिव पुराण- रूद्र संहिता: रूद्र और ऋषि कल्याण कारक है।
सचेतन :65 श्री शिव पुराण- रूद्र संहिता: रूद्र और ऋषि कल्याण कारक है। #RudraSamhita माना जाता है कि सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड से सदा ॐ की ध्वनी निसृत होती रहती है. हमारे और आपके हर श्वास से ॐ की ही ध्वनि निकलती है. यही हमारे-आपके श्वास की गति को नियंत्रित करता है. सर्वत्र व्याप्त होने के कारण […]
सचेतन :64 श्री शिव पुराण- रूद्र संहिता: शब्द ब्रह्ममय से ब्रह्मांड की उत्पत्ति
सचेतन :64 श्री शिव पुराण- रूद्र संहिता: शब्द ब्रह्ममय से ब्रह्मांड की उत्पत्ति #RudraSamhita ब्रह्माजी बोले ;– मुनिश्रेष्ठ नारद! को ‘ॐ’ नाद स्पष्ट रूप से सुनाई पड़ने के बाद कहा की आप ध्वनि को सिर्फ सुन ही नहीं सकते, देख भी सकते हैं। उसे महसूस करने का एक तरीका होता है। ब्रह्माजी बोले ;– मुनिश्रेष्ठ […]
सचेतन :63 श्री शिव पुराण- रूद्र संहिता: ब्रह्मा-विष्णु को भगवान शिव के शब्दमय शरीर का दर्शन
सचेतन :63 श्री शिव पुराण- रूद्र संहिता: ब्रह्मा-विष्णु को भगवान शिव के शब्दमय शरीर का दर्शन #RudraSamhita ब्रह्मा- विष्णु के बीच में अग्नि-स्तम्भ प्रकट हुआ उन्होंने तय किया कि जो भी इस स्तंभ का अंतिम छोर खोज लेगा, वही श्रेष्ठ होगा। ब्रह्मा जी स्तंभ के ऊपरी भाग में गए और विष्णु जी नीचे वाले हिस्से […]
