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सचेतन- 14:तैत्तिरीय उपनिषद्: शिक्षावल्ली – स्वर, लय और ताल का संतुलन

शिक्षावल्ली तैत्तिरीय उपनिषद् (यजुर्वेद की शाखा) का प्रथम भाग है। “वल्ली” का अर्थ है — लता या शाखा। इसलिए शिक्षावल्ली = वह शाखा जिसमें शिक्षा (उच्चारण, स्वर, लय और पाठ की शुद्धि) के विषय में ज्ञान दिया गया है। शिक्षा में उच्चारण, स्वर, मात्रा और बल की शुद्ध परंपरा।इसके छः अंग (तत्त्व) हैं  शिष्य को […]

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सचेतन- 05: सत् — सत्य और कर्म की शुद्धि

बहुत सुंदर और सारगर्भित बात है — “क्यों है मनुष्य जन्म कीमती?”इसका उत्तर वेदांत बहुत गहराई से देता है,क्यों है मनुष्य जन्म अनमोल? इस सृष्टि में लाखों योनियाँ हैं —पर केवल मनुष्य ही वह प्राणी हैजिसमें सत्-चित्-आनन्द का विकास संभव है। सत् — सत्य और कर्म की शुद्धि “सत्” का अर्थ है —जो सदा है, […]