“जैसे माँ अपने बच्चे को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है, वैसे ही साधना को भी अपने जीवन में अडिग स्थान देना चाहिए। प्रतिदिन थोड़ा समय, यदि श्रद्धा से समर्पित किया जाए, तो वह अंतरात्मा को बदल सकता है।” नमस्कार! आप सुन रहे हैं “सचेतन” — एक आंतरिक यात्रा की श्रृंखला। आज का विषय है — “माँ […]
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सचेतन- 05:साधना (Sādhanā): मन पर विजय की दिशा” “Sādhanā: Mastery of the Mind”
नमस्कार और स्वागत है आपका ‘सचेतन’ के इस आत्म-खोज के नए अध्याय में।आज हम बात करेंगे उस गहराई की, उस पथ की — जिसे हम कहते हैं: “साधना”। साधना केवल किसी धार्मिक कर्मकांड का नाम नहीं है, यह एक पवित्र अनुशासन (sacred discipline) है — जिसमें हमारा शरीर, श्वास और मन, तीनों एक ही ध्येय […]
सचेतन- 04: गुरु ग्रंथ साहिब में साधना का अर्थ
“साधना (Spiritual Practice)” का गुरु ग्रंथ साहिब में अत्यंत सुंदर, सरल और आत्मिक वर्णन किया गया है। यहाँ साधना केवल कोई क्रिया नहीं, बल्कि जीवन का मार्ग, प्रभु से मिलने की यात्रा, और अहंकार से मुक्त होकर प्रेममय जीवन जीने की प्रक्रिया है। गुरबाणी में साधना को आत्मिक उन्नति, नाम सुमिरन, सेवा और सहज अवस्था […]
सचेतन- 0३: बाइबिल में साधना का अर्थ
साधना (Spiritual Practice) का बाइबिल (Bible) में बहुत गहराई से वर्णन किया गया है, यद्यपि वहाँ “साधना” शब्द नहीं आता, लेकिन इसका भाव — आत्म-शुद्धि, ईश्वर से जुड़ना, और प्रेमपूर्ण जीवन जीना — पूरी बाइबिल में स्पष्ट रूप से दिखता है। बाइबिल में साधना का अर्थ है:ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण,प्रार्थना और ध्यान के माध्यम […]
सचेतन- 02: इस्लाम में साधना का अर्थ
साधना (Spiritual Practice) का स्पष्ट और सुंदर वर्णन कुरान (Qur’an) में भी किया गया है, यद्यपि शब्द “साधना” संस्कृत शब्द है और कुरान में यह शब्द नहीं आता, फिर भी इसका भाव और स्वरूप कुरान में गहराई से मौजूद है। इस्लाम में साधना का अर्थ है — ईश्वर (अल्लाह) से जुड़ने के लिए आत्म-शुद्धि, नम्रता, […]
सचेतन- 01: साधना (Spiritual Practice)
नमस्कार! स्वागत है आपका सचेतन के इस खास एपिसोड में। आज हम बात करेंगे साधना (Spiritual Practice) का वेदों और पुराणों में अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान है। वेद इसे आत्मा की खोज, ईश्वर की प्राप्ति, और मनुष्य जीवन की सर्वोच्च साधना मानते हैं। यह केवल धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि आत्मिक विकास और परम सत्य के अनुभव […]
सचेतन- 2: सुनने मात्र से चेतना की जागृति का मार्ग
चेतना को जानने के तीन मार्ग 1. श्रवण (Shravanam) – “सुनना और ग्रहण करना” परिभाषा: श्रवण का अर्थ है – गुरु या आचार्य से वेद, उपनिषद, भगवद्गीता जैसे शास्त्रों का ज्ञान श्रद्धा और ध्यानपूर्वक सुनना। महत्व: कैसे करें: कहानी: अर्जुन का श्रवण – समर्पण से ज्ञान की ओर कुरुक्षेत्र का मैदान युद्ध के लिए तैयार […]
