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सचेतन 241: शिवपुराण- वायवीय संहिता – योग-निरूपण

 मंत्र योग, स्पर्श योग, भावयोग, अभाव योग और महायोग मुनि उपमन्यु बोले, हे केशव ! अब मैं आपको योग विधि के बारे में बताता हूं। जिसके द्वारा सभी विषयों से निवृत्ति हो और अंतःकरण की सब वृत्तियां शिवजी में स्थित हो जाएं, वह परम योग है। आपका शून्य होना ही आपका प्राकृतिक गुण है क्योंकि…