“क्या आपने कभी सपना देखा है…और सपने में ही रोए हैं, डर गए हैं, खुश हो गए हैं? उस समय सपना बिल्कुल सच लगता है।लेकिन जागने के बाद हम कहते हैं—‘अरे, यह तो बस सपना था।’ शंकराचार्य कहते हैं—संसार भी कुछ ऐसा ही है।” संसारः स्वप्नतुल्यो हि रागद्वेषादिसंकुलः। स्वकाले सत्यवद्भाति प्रबोधे सत्यसद्भवेत्॥६॥ सरल अर्थ “यह […]
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सचेतन 3.17-18 : नाद योग: अंतरस्थ विषय: योग और ध्यान की गहनता का केंद्र
सचेतन 3.17-18 : नाद योग: अंतरस्थ विषय: योग और ध्यान की गहनता का केंद्र नमस्कार श्रोताओं, और स्वागत है इस हमारे विशेष नाद योग (योग विद्या) पर सचेतन के इस विचार के सत्र में. आज हम बात करेंगे “अंतरस्थ विषय” के बारे में, जो योग और ध्यान की गहनता का केंद्र होता है। यह विषय […]
सचेतन 3.17 : नाद योग: अंतरस्थ विषय: योग और ध्यान की गहनता का केंद्र
नमस्कार श्रोताओं, और स्वागत है इस हमारे विशेष नाद योग (योग विद्या) पर सचेतन के इस विचार के सत्र में. आज हम बात करेंगे “अंतरस्थ विषय” के बारे में, जो योग और ध्यान की गहनता का केंद्र होता है। यह विषय योग साधना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और हमारे ध्यान को गहराई तक ले […]
