सचेतन- 02:  आत्मबोध की यात्रा – “ज्ञान ही मोक्ष का सीधा साधन है”

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सचेतन- 02:  आत्मबोध की यात्रा – “ज्ञान ही मोक्ष का सीधा साधन है”

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“हम जीवन भर बहुत कुछ करते रहते हैं…
पूजा, जाप, यात्रा, योग, ध्यान…

लेकिन एक सवाल चुपचाप खड़ा रहता है—
क्या इससे सचमुच मुक्ति मिलती है?

शंकराचार्य इस श्लोक में
बहुत स्पष्ट उत्तर देते हैं।”

बोधोऽन्यसाधनेभ्यो हि साक्षान्मोक्षैकसाधनम्।
पाकस्य वह्निवज्ज्ञानं विना मोक्षो न सिध्यति॥

“जैसे भोजन पकाने के लिए
सीधे तौर पर आग ही चाहिए—
वैसे ही मोक्ष के लिए
सीधा साधन केवल ज्ञान है।

बिना आत्मज्ञान के
मोक्ष कभी संभव नहीं होता।”

जीवन से जुड़ा प्रश्न 

“दोस्तों,
ईमानदारी से खुद से पूछिए—

हम पूजा क्यों करते हैं?
हम मंत्र क्यों जपते हैं?
हम तीर्थ क्यों जाते हैं?

क्योंकि
हम शांति चाहते हैं।
हम दुख से मुक्ति चाहते हैं।

लेकिन अगर ये सब करने के बाद भी
मन वैसा ही उलझा है,
तो शायद कुछ समझने की ज़रूरत है।”

“शंकराचार्य बहुत साफ़ कहते हैं—

आत्मबोध कोई एक साधन नहीं है,
वही एकमात्र साधन है।

तो फिर सवाल उठता है—
अगर ज्ञान ही सब कुछ है,
तो शास्त्रों में
इतनी सारी साधनाएँ क्यों बताई गई हैं?

पूजा, जप, व्रत, योग, ध्यान…
क्या ये सब व्यर्थ हैं?

नहीं।

शंकराचार्य कहते हैं—
ये सब परोक्ष साधन हैं।
ये आपको तैयार करते हैं।

लेकिन
सीधे मोक्ष देने वाला
केवल आत्मज्ञान है।

बहुत सुंदर उदाहरण – आग और भोजन 

“अब शंकराचार्य एक बहुत सरल उदाहरण देते हैं—

खाना पकाने के लिए
हमें बहुत सी चीज़ें चाहिए—

बर्तन, सब्ज़ी, पानी, मसाले…

लेकिन सच बताइए—
अगर आग न हो,
तो क्या खाना बनेगा?

नहीं।

ठीक वैसे ही—
पूजा, ध्यान, योग, तप—
सब उपयोगी हैं।

लेकिन अगर आत्मज्ञान नहीं है,
तो मोक्ष नहीं हो सकता।”

गहरी बात – उपलब्धियाँ और मोक्ष 

“शंकराचार्य एक और गहरी बात कहते हैं—

आप ब्रह्मलोक तक पहुँच जाएँ…
विष्णुलोक देख लें…
शिवलोक का अनुभव कर लें…

तो भी पूछते हैं—
‘तो क्या?’

अगर आपने
अपने आप को नहीं जाना,
तो ये सब भी
आपको मुक्त नहीं कर सकते।

आप आग खा लें,
पानी पर चल लें,
समुद्र पार कर लें—

लेकिन अगर आत्मज्ञान नहीं है,
तो मोक्ष नहीं है।

कठोर बात है…
पर सत्य है।”

हमारे लिए इसका मतलब क्या है?

“इस श्लोक का संदेश बहुत व्यावहारिक है—

👉 साधना छोड़नी नहीं है
👉 लेकिन साधना को अंत नहीं समझना है

पूजा मन को शुद्ध करे—
ध्यान मन को शांत करे—
योग शरीर और मन को स्थिर करे—

और फिर…
ज्ञान को जन्म लेने दे।

क्योंकि
अंधकार को हटाने के लिए
केवल प्रकाश चाहिए।
और जीवन के अज्ञान को हटाने के लिए
केवल ज्ञान।”

“दोस्तों,
यह श्लोक हमें डराने नहीं आया है।
यह हमें स्पष्टता देने आया है।

साधना करते रहिए—
लेकिन यह मत भूलिए—

अंत में जो मुक्त करता है, वह आत्मज्ञान ही है।

यही Atmabodha का संदेश है। यही Sachetan की दिशा है।Stay Sachetan…
Stay Aware…
Stay in Knowledge.”

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