बुद्धचरित की कथा – सिद्धार्थ और बिंबिसार संवाद जब मगधराज बिंबिसार ने राजकुमार सिद्धार्थ को राज्य और समृद्धि की ओर आकर्षित करने वाली बातें कहीं, तो शांत और गंभीर मन से सिद्धार्थ ने उत्तर दिया। उन्होंने कहा – “हे राजन्! आप चन्द्रवंश में जन्मे हैं, आपके द्वारा ऐसा कहना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। […]
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सचेतन:बुद्धचरितम्-15 श्रेणभिगमनम्: (राजमार्ग का अनुसरण)
यह कहानी एक ऐसे राजकुमार की है, जिसने अपनी विलासपूर्ण जीवनशैली, महल, परिवार और राज्य को छोड़कर सत्य की खोज में निकलने का निश्चय किया। राजकुमार ने मंत्री और पुरोहित को पीछे छोड़ दिया और गंगा नदी को पार करके राजगृह नामक नगरी पहुँचा। राजगृह धन-धान्य और सुंदर भवनों से सम्पन्न एक भव्य नगरी थी। […]
सचेतन:बुद्धचरितम्-14 कुमारान्वेषणम् – बुद्ध का वन में दृढ़ निश्चय
राजा शुद्धोदन का पुत्र सिद्धार्थ घर छोड़कर संन्यास के लिए वन की ओर चला गया था। यह सुनकर नगर में सब ओर शोक फैल गया। राजा को गहरा दुख हुआ, और उन्होंने अपने सबसे बुद्धिमान मंत्री और वृद्ध पुरोहित को राजकुमार को ढूँढकर समझाने और वापस लाने के लिए भेजा। मंत्री और पुरोहित चलते-चलते भार्गव […]
सचेतन:बुद्धचरितम्-13 अन्तःपुरविलाप (Lamentation of the Palace):
महल में बुद्ध के जाने के बाद की विलाप का वर्णन। जब राजकुमार सिद्धार्थ ने संन्यास ग्रहण कर वन की ओर प्रस्थान किया, तब उनके प्रिय सारथी छन्दक और उनका घोड़ा कन्धक उन्हें रोकने का पूरा प्रयास करते रहे। लेकिन सिद्धार्थ का संकल्प अडिग था। वे सांसारिक मोह और बंधनों से मुक्त होकर सत्य की […]
सचेतन:बुद्धचरितम्-12 तपोवनप्रवेशम् (Entry into the Forest of Austerities):
बुद्ध ने अपनी साधना की यात्रा में कई तपस्वियों के साथ कुछ समय बिताया। वे उनकी कठिन तपस्याओं को देखते और समझते रहे। कुछ दिन वहां ठहरने के बाद उन्होंने निर्णय लिया कि अब आगे बढ़ना चाहिए। जब वे वहां से जाने लगे, तो आश्रम के साधु-संत उनके पीछे-पीछे चल पड़े। उनमें से एक वृद्ध […]
सचेतन: समझो ऑटिज़्म को – 2 अप्रैल का महत्व
नमस्कार दोस्तों! “समझो और साथ चलो” – आज सचेतन की इस विचार के सत्र में हम बात करते हैं – जो आपको समाज के उन खास हिस्सों से जोड़ता है, जिनकी ज़रूरत है हमारी समझ, हमारा साथ। आज की तारीख है 2 अप्रैल, और आज हम बात करेंगे “वर्ल्ड ऑटिज्म अवेयरनेस डे” की। क्या आपने […]
सचेतन:बुद्धचरितम्-11 तपोवनप्रवेशम् (Entry into the Forest of Austerities)
जब गौतम बुद्ध ने अपने सारथी छन्दक को वापस भेज दिया और वन में स्वतंत्रता से घूमने की इच्छा की, तो उनका तेजस्वी और प्रभावशाली व्यक्तित्व हर ओर चमक रहा था। उनके शरीर की अद्भुत शोभा सिंह के समान थी, जिससे वे किसी भी जगह को अपने प्रभाव से भर देते थे। जब वे एक […]
सचेतन:बुद्धचरितम्-10 छन्दकनिवर्तनम् (The Return of Chandak):
छन्दक (बुद्ध का सारथी) के रथ लौटाने और बुद्ध के अकेले तपस्या की ओर बढ़ने का वर्णन। कुछ मुहूर्त में भगवान भास्कर के उदित हो जाने पर वे नरश्रेष्ठ एक आश्रम जा पहुँचे थे। सिद्धार्थ गौतम ने अपने सामने एक पवित्र स्थान देखा। यह था भार्गव ऋषि का आश्रम, जहाँ चारों ओर शांति और आध्यात्मिकता […]
सचेतन:बुद्धचरितम्-9 अभिनिष्क्रमण-3 (The Great Renunciation)
मुक्ति की राह पर पहला कदम राजकुमार सिद्धार्थ ने दृढ़ निश्चय के साथ घोड़े की पीठ पर चढ़ते हुए सिंहनाद किया, “जब तक मैं जन्म और मृत्यु के चक्र का अंत नहीं देख लूँगा, तब तक मैं इस कपिलवस्तु नगर में वापस नहीं लौटूँगा!” उनकी इस प्रतिज्ञा को सुनकर देवता भी प्रसन्न हो उठे। स्वर्ग […]
सचेतन:बुद्धचरितम्-8 अभिनिष्क्रमण-2 (The Great Renunciation)
एक समय की बात है, जब राजकुमार सिद्धार्थ के हृदय में वैराग्य का बीज अंकुरित हो चुका था। उनकी यह भावना इतनी प्रबल हो उठी कि वे अपने पिता और राजा की आज्ञा लेकर एक बार फिर वन की ओर चल पड़े। उनके मन में वन की सुंदरता और प्रकृति के अद्भुत गुणों को निहारने […]
