सचेतन 2.100 : रामायण कथा: सुन्दरकाण्ड – रावण की प्रतिक्रिया और हनुमान जी की अंतिम चेतावनी

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सचेतन 2.100 : रामायण कथा: सुन्दरकाण्ड – रावण की प्रतिक्रिया और हनुमान जी की अंतिम चेतावनी

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“धर्म युद्ध की गाथा: हनुमानजी का पराक्रम”

नमस्कार श्रोताओं! स्वागत है आपका “धर्मयुद्ध की कहानियाँ” के तीसरे पड़ाव पर इस सचेतन के विचार के सत्र में। पिछले एपिसोड में हमने सुना कि हनुमान जी ने रावण को श्रीराम का पराक्रम और उनकी धर्मनिष्ठा के बारे में बताया। आज के एपिसोड में हम सुनेंगे कि रावण ने क्या प्रतिक्रिया दी और हनुमान जी ने उसे अंतिम चेतावनी कैसे दी। तो चलिए, शुरू करते हैं।

हनुमान जी की बातें सुनकर रावण का क्रोध बढ़ता गया। उसने अपनी आँखें तरेरकर अपने सेवकों को हनुमान जी के वध की आज्ञा दी की हनुमान, तुम्हारी ये बातें हमें स्वीकार नहीं। सेवकों! इसे पकड़कर मार डालो।

हनुमान जी कहते हैं राक्षसराज, मैं तुम्हें सचेत कर रहा हूँ। तुम्हारी यह क्रूरता तुम्हें और तुम्हारे राज्य को विनाश की ओर ले जाएगी।हनुमान जी ने रावण को अंतिम चेतावनी दी और उसे समझाया कि सीता को वापस लौटाने से ही उसका और उसके राज्य का कल्याण हो सकता है।

फिर विनम्रता से हनुमान जी ने कहा की राक्षसराज! सुग्रीव और श्रीरामचन्द्रजी न तो देवता हैं, न यक्ष हैं और न राक्षस ही हैं। श्रीरघुनाथजी मनुष्य हैं और सुग्रीव वानरों के राजा। अतः उनके हाथ से तुम अपने प्राणों की रक्षा कैसे करोगे?

रावण जवाब देते हैं की तुम्हारे श्रीराम और सुग्रीव हमारे लिए कोई खतरा नहीं हैं।

हनुमान जी ने कहा “राजन्! मैंने यहाँ सीता की अवस्था को लक्ष्य किया है। वे निरन्तर शोक में डूबी रहती हैं। सीता तुम्हारे घर में पाँच फनवाली नागिन के समान निवास करती हैं, जिन्हें तुम नहीं जानते हो।”

हनुमान जी ने रावण को बताया कि श्रीराम के क्रोध से बचने का कोई उपाय नहीं है और सीता का हरण करके उसने स्वयं अपने विनाश को निमंत्रण दिया है।

हनुमान जी ने कहा श्रीरामचन्द्रजी तीनों लोकों के स्वामी हैं। देवता, दैत्य, गन्धर्व, विद्याधर, नाग तथा यक्ष-ये सब मिलकर भी युद्ध में उनके सामने नहीं टिक सकते। चार मुखोंवाले स्वयम्भू ब्रह्मा, तीन नेत्रोंवाले त्रिपुरनाशक रुद्र अथवा देवताओं के स्वामी महान् ऐश्वर्यशाली इन्द्र भी समराङ्गण में श्रीरघुनाथजी के सामने नहीं ठहर सकते।

रावण ने कहा की हनुमान, तुम हमें डरा नहीं सकते।

हनुमान जी ने कहा “मैं तुम्हें डरा नहीं रहा, राक्षसराज। मैं तुम्हें सचेत कर रहा हूँ। सीता को लौटाना ही तुम्हारे लिए कल्याणकारी है।”

हनुमान जी की बातों ने रावण को विचलित कर दिया, लेकिन उसका अहंकार उसे सही निर्णय लेने से रोक रहा था। हनुमान जी ने रावण को अंतिम चेतावनी दी और कहा: राक्षसराज! यह मेरी अंतिम चेतावनी है। श्रीराम का क्रोध और उनकी सेना तुम्हारे विनाश का कारण बनेगी। सीता को लौटाकर अपने और अपने राज्य का कल्याण करो।

तो श्रोताओं, आज के एपिसोड में हमने सुना कि हनुमान जी ने रावण को कैसे अंतिम चेतावनी दी और श्रीराम के पराक्रम का वर्णन किया। उम्मीद है आपको यह कथा पसंद आई होगी। अगले एपिसोड में हम एक नई कहानी के साथ फिर मिलेंगे। तब तक के लिए, नमस्कार!

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