सचेतन — 31 “आत्मा — जो आप वाकई हो”
नमस्कार। पिछले episode में आपने सीखा कि आप क्या नहीं हो।
अब समय है सीखने का कि आप वाकई क्या हो।
यह episode आपकी पूरी पहचान बदल देगा।
लेकिन बहुत सीधा। बहुत सरल। बहुत प्रत्यक्ष।
शुरू करते हैं।
आदित्य को अचानक पता चल गया
आदित्य एक meditation करते हुए थे।
30 मिनट बैठे रहे। कुछ नहीं सोचा। बस… बैठे रहे।
अचानक एक बात उनके दिमाग़ में आई।
“अरे… मैं तो बहुत सरल हूँ।”
“मैं जटिल नहीं हूँ।”
“मैं तो बस… हूँ।”
सब से सरल।
कोई property नहीं। कोई identity नहीं। कोई story नहीं।
बस… existence।
pure, clean, simple existence।
आदित्य को ऐसी शांति आई। ऐसी peace आई।
कि उनके eyes में tears आ गए।
“यह मैं हूँ। यह सब समय से ही हूँ। मैं कभी खोया नहीं था।”
सीमा को याद आया
सीमा बचपन में थीं।
5 साल की थीं।
कोई चिंता नहीं था। कोई identity नहीं था। कोई social role नहीं था।
बस… खुशी थी। बस ही था।
फिर धीरे-धीरे बड़ी हुईं।
School गईं। Identity मिलने लगी। “मैं अच्छी student हूँ।”
फिर career। “मैं successful हूँ।”
फिर family। “मैं mother हूँ।”
हर बार एक नई identity। हर बार एक नई चिंता।
लेकिन एक दिन जब सीमा अपनी बेटी को खेलते हुए देख रही थीं।
बेटी बिल्कुल worry-free था। पूरी तरह innocent।
अचानक सीमा को अपने आप में वही innocence दिख गई।
“अरे, वह तो अभी भी यहाँ है।”
“मैं वह बचपन वाली खुशी अभी भी हूँ।”
“सब identities तो wrapper हैं। असली मैं तो same हूँ।”
राज को सवाल उठा
राज एक बहुत बुद्धिमान आदमी हैं।
लेकिन एक दिन उन्हें एक बहुत सरल बात समझ आई।
“अगर मैं अपने सब thoughts को देख सकता हूँ।”
“अगर मैं अपने सब emotions को observe कर सकता हूँ।”
“अगर मैं अपने सब experiences को भूल सकता हूँ।”
“तो मैं सब इन चीज़ों से अलग हूँ।”
“मैं तो बस awareness हूँ।”
“मैं वह आँख हूँ जो सब को देख रही है।”
“लेकिन खुद को नहीं देखी जा सकती।”
राज को एक बहुत बड़ा relief मिला।
“मैं तो safe हूँ। मैं तो कभी damaged नहीं हो सकता।”
“क्योंकि मैं तो ये सब चीज़ें हूँ ही नहीं।”
अब समझते हैं
आत्मा क्या है? बहुत सरल।
आत्मा = Pure Consciousness।
आत्मा = Pure Awareness।
आत्मा = Pure Existence।
आत्मा की 5 गुण
एक — कोई दूसरा नहीं। अद्वितीय।
शाश्वत — हमेशा है। कभी खत्म नहीं होता।
अपरिवर्तनीय — कभी change नहीं होता। सदा same।
सर्वव्यापी — सब जगह है। सब में है।
आनंद — हमेशा खुश। हमेशा शांत।
सबसे महत्वपूर्ण
आत्मा आप का असली identity नहीं है।
आत्मा तो आप ही है।
बिना किसी identity के।
identity तो बस एक outfit है।
जैसे आप actor हो। Movie में कोई role play करते हो।
Role में आप कोई बनते हो। लेकिन असल में वह नहीं होते।
वैसे ही।
आप का जो name है, address है, job है, family है।
यह सब roles हैं।
लेकिन आप तो बस awareness हो। बस consciousness हो।
आत्मा का Experience
क्या आप आत्मा को experience कर सकते हो?
हाँ।
लेकिन experience नहीं… realization।
आप आत्मा को नहीं “feel” करते।
आप आत्मा को जानते हो कि “यह मैं ही हूँ।”
कैसे जानते हो
कभी ध्यान करते हो।
सब thoughts stop हो जाते हैं।
सब emotions quiet हो जाते हैं।
और बस… एक गहरी शांति रह जाती है।
वह शांति = आत्मा का अनुभव।
कौन सी बात सदा Same रहती है
आप के जीवन में कितना change आता है?
Job बदलता है। City बदलता है। Relationship बदलता है। Body बदलता है।
लेकिन कौन सा part आप में ऐसा है जो कभी नहीं बदलता?
वह part जो सब को observe करता है।
वह part जो सब को know करता है।
वह part जो always present है।
वही आत्मा है।
आत्मा की सबसे बड़ी बात
आत्मा तो आप ने कभी खोया ही नहीं।
आप तो हमेशा आत्मा ही रहे हो।
सिर्फ भूल गए थे।
सिर्फ confusion में थे।
लेकिन खोया नहीं।
जैसे आप का wallet खो गया तो आप तो बचे रहे।
वैसे ही।
आप की सब identities खो सकती हैं।
लेकिन आप नहीं।
क्योंकि आप तो non-perishable हो।
आत्मा = आनंद
आत्मा का nature ही है आनंद।
Eternal joy।
Permanent happiness।
लेकिन conditions के साथ नहीं।
“मेरे पास पैसा हो तो खुश।”
नहीं।
बिना किसी condition के खुश।
बस… खुश।
आत्मा की सबसे बड़ी बात
आत्मा सब का same है।
आप की आत्मा same है।
आपके दोस्त की आत्मा same है।
आपके दुश्मन की आत्मा same है।
सब की आत्मा एक ही है।
इसलिए…
जब आप अपनी आत्मा को जान जाते हो।
तब आप सब में अपनी आत्मा को देख जाते हो।
तब सब आपका ही होता है।
आज का सवाल
अपने आप से पूछो।
“क्या मैं aware हूँ? हाँ।”
“तो मैं awareness हूँ। consciousness हूँ।”
“और वह कभी change नहीं होती।”
“तो मैं eternal हूँ।”
“वह कभी जन्म नहीं लेती।”
“तो मैं unborn हूँ।”
“वह कभी मरती नहीं।”
“तो मैं immortal हूँ।”
आखिरी बात
आत्मा की सबसे बड़ी बात यह है।
आप आत्मा को खोज नहीं रहे हो।
आप आत्मा को याद कर रहे हो।
आप आत्मा को realize कर रहे हो।
क्योंकि आप वही हो।
हमेशा से हो।
सदा रहोगे।
यह असली आप है।
यह था सचेतन।
🙏 आत्मा को जानना = अपने आप को जानना = सब कुछ को जानना।
नमस्कार। 🙏
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