षट्संपत्ति को छः खजाने भी कहा जाता है—ये साधना को स्थिर करने की ताकत देते हैं: ये छह गुण साधक को भीतर से मजबूत बनाते हैं। (और यह गुण बचपन से बड़े होने तक कैसे बदलता है) नमस्कार साथियो, आज हम षट्संपत्ति के तीसरे गुण—उपरति (Uparati) की बात करेंगे।उपरति का अर्थ है—अनावश्यक चीज़ों से स्वाभाविक […]
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सचेतन- 48 वेदांत सूत्र: “दम: इंद्रियों का स्वामी बनने की कला”
नमस्कार साथियो, आज हम बात करेंगे षट्सम्पत्ति के दूसरे सुंदर गुण—दम (Dama) के बारे में।दम का साधारण अर्थ है—इंद्रियों पर नियंत्रण,पर वेदांत में इसका मतलब इससे कहीं गहरा है। इंद्रियाँ हमें कहाँ खींचकर ले जाती हैं? हमारी पाँच ज्ञानेंद्रियाँ—आँखें, कान, नाक, जीभ और त्वचा—हर पल हमें दुनिया की ओर खींचती रहती हैं। ● कोई स्वादिष्ट […]
सचेतन- 47 वेदांत सूत्र: शम: मन को शांत करने की कला
वेदांत कहता है—“मन तैयार हो जाए, तो सत्य का अनुभव सहज हो जाता है।” सत्य कोई दूर की चीज़ नहीं है,और न ही यह किसी विशेष स्थान में छुपा हुआ है।सत्य तो हमारे भीतर ही है—बस मन की चंचलता, अशांति और इच्छाओं की धूल उसे ढँक देती है। इसीलिए आत्मज्ञान की यात्रा में कहा गया […]
सचेतन- 46 वेदांत सूत्र: 🌼 “आत्म-साक्षात्कार का मार्ग और षट्सम्पत्ति की तैयारी”
सचेतन सुनने वाले सभी साथियों को मेरा प्रणाम।आज हम बात करेंगे—आत्म-साक्षात्कार, यानी अपने असली स्वरूप को पहचानने की यात्रा के बारे में।वेदांत इसे मानव जीवन की सबसे सुंदर और सबसे सच्ची खोज कहता है। हम सब अपने जीवन में बहुत कुछ खोजते हैं—सुख, शांति, सफलता, मान-सम्मान…लेकिन धीरे-धीरे एक सवाल भीतर उठता है—“मैं सच में कौन […]
सचेतन- 45 वेदांत सूत्र: विरह → विरक्ति → वैराग्य → संन्यास
वेदान्त की चार सीढ़ियाँनमस्कार दोस्तों,आप सुन रहे हैं सचेतन —जहाँ हम जीवन, मन और आत्मा के अनुभवों कोसरल भाषा में समझते हैं। आज का विषय है—विरह, विरक्ति, वैराग्य और संन्यास वेदान्त में ये चारों एक गहरी, आंतरिक यात्रा के चरण हैं।बाहरी दुनिया से भीतर की ओर लौटने की यात्रा। विरह — दूरी का दर्द विरह […]
सचेतन- 44 वेदांत सूत्र: वैराग्य: त्याग नहीं, अनासक्ति
नमस्कार दोस्तों,आप सुन रहे हैं सचेतन —जहाँ हम जीवन और आत्मा के गहरे सच कोसरल और सहज भाषा में समझते हैं। आज हम बात करेंगे—वैराग्य की। लेकिन वह वैराग्य नहीं जिसे त्याग समझ लिया जाता है…बल्कि वास्तविक वैराग्य, जो मन की आज़ादी है। वैराग्य क्या है? हम अक्सर सोचते हैं कि वैराग्य मतलब— सब छोड़ […]
सचेतन- 42 वेदांत सूत्र: साधना-चतुष्टय — मोक्ष और आत्मज्ञान के लिए चार आवश्यक योग्यताएँ
नमस्कार दोस्तों,आप सुन रहे हैं सचेतन,जहाँ हम जीवन को भीतर से समझने की कोशिश करते हैं—शांति, विवेक और आत्मज्ञान के रास्तों पर चलने की प्रेरणा लेते हैं। आज का विषय है—“साधना-चतुष्टय: मोक्ष या आत्मज्ञान की राह में ज़रूरी चार योग्यताएँ।” ये चार योग्यताएँ सिर्फ़ आध्यात्मिक साधना के लिए ही नहीं,बल्कि रोज़मर्रा के जीवन को सुंदर, […]
सचेतन- 41 वेदांत सूत्र: “मोक्ष: जीते-जी मुक्त होने का आनंद”
सचेतन- 41 वेदांत सूत्र: “मोक्ष: जीते-जी मुक्त होने का आनंद”(The Joy of Realizing Oneness) नमस्कार दोस्तों 🌸स्वागत है “जीवन के सूत्र” में।आज हम बात करेंगे वेदांत के चौथे अध्याय — फल अध्याय — की,जहाँ एक साधक की साधना का अंतिम फल बताया गया है। वह फल है — जीव और ब्रह्म की एकता का अनुभव,और […]
सचेतन- 40 वेदांत सूत्र: “साधना का मार्ग – जीवन को पूजा बनाना”
सचेतन- 40 वेदांत सूत्र: “साधना का मार्ग – जीवन को पूजा बनाना” (How Practice Turns Life into Meditation) नमस्कार दोस्तों 🌸स्वागत है “जीवन के सूत्र” में।आज हम बात करेंगे वेदांत के तीसरे अध्याय की —साधन अध्याय, यानी साधना का मार्ग। वेदांत कहता है — “सच्चा ज्ञान केवल पढ़ने या सुनने से नहीं,बल्कि जीने से आता […]
सचेतन- 37 वेदांत सूत्र: चार अध्यायों में जीवन का मार्ग
वेदांत सूत्र कुल चार अध्यायों में विभाजित है।ये चारों अध्याय केवल दर्शन नहीं बताते, बल्कि जीवन के चार कदम सिखाते हैं —ज्ञान से लेकर मुक्ति (आनंद) तक की यात्रा। क्रम अध्याय का नाम विषय जीवन से सम्बन्ध 1️⃣ समाधि / सम्बन्ध अध्याय ब्रह्म का स्वरूप बताता है कि ब्रह्म ही इस जगत का कारण, आधार […]
