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सचेतन- 08: सच्चे साधक का मार्ग

“तपसा ब्रह्म विजिज्ञासस्व” — यजुर्वेद “तप द्वारा ब्रह्म को जानने का प्रयास करो।” यानी तप आत्मा और परमात्मा को जोड़ने वाला साधन है। तप का व्यावहारिक रूप (आज के जीवन में) तप आज के अर्थ में सुबह जल्दी उठना शरीर और मन पर अनुशासन क्रोध को रोकना मन का तप अहिंसा और करुणा से व्यवहार […]

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सचेतन- 07: तप (Tap/perseverance/tenacity)

एक छोटा सा शब्द, लेकिन इसका अर्थ बहुत गहरा, विस्तृत और आत्मिक होता है। तप का शाब्दिक अर्थ है तपना, यानी स्वयं को अनुशासन, संयम और कठिनाई में डालकर किसी उच्च उद्देश्य की प्राप्ति के लिए प्रयासरत रहना।अंग्रेज़ी में इसे Perseverance या Tenacity कहा जा सकता है – यानी किसी लक्ष्य के प्रति अटल रहना, […]

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सचेतन- 06:साधना की माँ जैसी प्राथमिकता

“जैसे माँ अपने बच्चे को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है, वैसे ही साधना को भी अपने जीवन में अडिग स्थान देना चाहिए। प्रतिदिन थोड़ा समय, यदि श्रद्धा से समर्पित किया जाए, तो वह अंतरात्मा को बदल सकता है।” नमस्कार! आप सुन रहे हैं “सचेतन” — एक आंतरिक यात्रा की श्रृंखला। आज का विषय है — “माँ […]

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सचेतन- 05:साधना (Sādhanā): मन पर विजय की दिशा” “Sādhanā: Mastery of the Mind”

नमस्कार और स्वागत है आपका ‘सचेतन’ के इस आत्म-खोज के नए अध्याय में।आज हम बात करेंगे उस गहराई की, उस पथ की — जिसे हम कहते हैं: “साधना”। साधना केवल किसी धार्मिक कर्मकांड का नाम नहीं है, यह एक पवित्र अनुशासन (sacred discipline) है — जिसमें हमारा शरीर, श्वास और मन, तीनों एक ही ध्येय […]

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सचेतन- 04: गुरु ग्रंथ साहिब में साधना का अर्थ

“साधना (Spiritual Practice)” का गुरु ग्रंथ साहिब में अत्यंत सुंदर, सरल और आत्मिक वर्णन किया गया है। यहाँ साधना केवल कोई क्रिया नहीं, बल्कि जीवन का मार्ग, प्रभु से मिलने की यात्रा, और अहंकार से मुक्त होकर प्रेममय जीवन जीने की प्रक्रिया है। गुरबाणी में साधना को आत्मिक उन्नति, नाम सुमिरन, सेवा और सहज अवस्था […]

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सचेतन- 02: इस्लाम में साधना का अर्थ

साधना (Spiritual Practice) का स्पष्ट और सुंदर वर्णन कुरान (Qur’an) में भी किया गया है, यद्यपि शब्द “साधना” संस्कृत शब्द है और कुरान में यह शब्द नहीं आता, फिर भी इसका भाव और स्वरूप कुरान में गहराई से मौजूद है। इस्लाम में साधना का अर्थ है — ईश्वर (अल्लाह) से जुड़ने के लिए आत्म-शुद्धि, नम्रता, […]

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सचेतन- 01: साधना (Spiritual Practice)

नमस्कार! स्वागत है आपका सचेतन के इस खास एपिसोड में। आज हम बात करेंगे साधना (Spiritual Practice) का वेदों और पुराणों में अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान है। वेद इसे आत्मा की खोज, ईश्वर की प्राप्ति, और मनुष्य जीवन की सर्वोच्च साधना मानते हैं। यह केवल धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि आत्मिक विकास और परम सत्य के अनुभव […]

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सचेतन- 11:सत् चित् आनन्द और सत्यम शिवम् सुंदरम् का जीवंत उदाहरण

सत् (सत्य या अस्तित्व का अनुभव) यथार्थ को जानना, सच्चाई में जीना, और सही कर्म करना। उदाहरण: चित् (ज्ञान और विवेक की जागरूकता) चेतना, आत्मबोध, और भीतर की समझ। उदाहरण: आनन्द (परम सुख, जो आत्मा से जुड़कर आता है) नित्य, शाश्वत, भीतर से उपजा हुआ सुख। उदाहरण: सत्यम शिवम् सुंदरम् (सत्य ही शिव है, और […]

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सचेतन- 09: यह चेतन एक प्रयोगशाला है: जीवन का अंतर्यात्रा स्थल

हमारा मन, शरीर और आत्मा — ये मिलकर चेतन प्रयोगशाला की तरह हैं। 🧘‍♀️ क्यों है यह चेतन प्रयोगशाला विशेष? क्योंकि… “जीवन एक प्रयोगशाला है, और चेतना उस प्रयोग का केंद्र है। सत्, चित् और आनन्द — इसी प्रयोग का अंतिम फल है।” मन: चेतन प्रयोगशाला का प्रयोगकर्ता जहाँ मन प्रयोग करता है — अपने […]

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सचेतन- 08: सत्-चित्-आनन्द – मनुष्य जीवन की अनमोल यात्रा

नमस्कार साथियो,आप सुन रहे हैं सचेतन,जहाँ हम बात करते हैं आत्मिक जागरण की,और उस सत्य की जो हमारे भीतर ही छुपा है। आज का विषय है —“सत्-चित्-आनन्द” — यह कोई शब्द नहीं,बल्कि मनुष्य जीवन की तीन दिव्य सीढ़ियाँ हैंजो हमें अज्ञान से ज्ञान की ओर,अस्थिरता से स्थिरता की ओर,और दुख से आनंद की ओर ले […]