सचेतन — 39 “संसार का पेड़ — bondage की पूरी संरचना”

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सचेतन — 39 “संसार का पेड़ — bondage की पूरी संरचना”

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नमस्कार। अब तक हमने bondage के सभी parts समझे हैं।

Adhyasa (superimposition)।

Ego (false claim)।

Avarana और Vikshep (veiling and dispersing)।

लेकिन यह सब आपस में कैसे जुड़े हुए हैं?

यह पूरी bondage की संरचना कैसी है?

Vivekachudamani देता है एक बहुत beautiful metaphor।

संसार को एक पेड़ की तरह दिखाता है।

और यह episode है उस पेड़ के हर एक हिस्से को समझने की।

क्योंकि जब आप structure को समझ जाते हैं… तब आप उसे उखाड़ना जानते हैं।

संसार का पेड़

Seed (बीज) = Ignorance (अज्ञान)

सब कुछ अज्ञान से शुरू होता है।

“मैं consciousness नहीं हूँ। मैं body हूँ।”

यह ignorance ही वह seed है जिससे पूरा bondage का पेड़ grow होता है।

Sprout (अंकुर) = Body-Self Identification (देहात्म-बुद्धि)

Seed germinate होता है तो क्या आता है?

Sprout।

पहली चीज़ जो उगती है।

वैसे ही, ignorance के साथ सबसे पहली चीज़ जो आती है।

“मैं body हूँ।”

यह body-self identification।

यही वह sprout है।

Leaves (पत्ते) = Attachment (राग)

अब पेड़ grow करता है तो पत्ते आते हैं।

वैसे ही, जब आप अपने आप को body के साथ identify करते हो।

तो attachment आता है।

“यह body मेरा है।”

“मुझे इसे protect करना है।”

“मुझे इसे beautiful बनाना है।”

यह attachment ही है पेड़ के पत्ते।

Water (पानी) = Action (कर्म)

अब पेड़ grow करने के लिए क्या चाहिए?

Water।

पानी के बिना पेड़ grow नहीं हो सकते।

वैसे ही, bondage के पेड़ को grow करने के लिए क्या चाहिए?

Action। Karma।

जब आप attachment में कर्म करते हो… तो कर्म बीज बन जाता है।

और नए bondage आते हैं।

Trunk (तना) = Body (शरीर)

पेड़ का मुख्य हिस्सा क्या होता है?

Trunk।

शरीर ही पेड़ का trunk है।

यह सब कुछ का central support है।

लेकिन trunk अकेला नहीं है।

Branches (शाखाएँ) = Life Forces (प्राण)

Trunk से निकलती हैं branches।

शरीर में से आते हैं life forces (prana)।

ये branches हैं।

Sub-branches (उपशाखाएँ) = Senses (इन्द्रियाँ)

Branches से निकलती हैं smaller branches।

Prana से निकलती हैं senses।

ये उपशाखाएँ हैं।

Flowers (फूल) = Objects (विषय)

पेड़ की शाखाओं पर फूल खिलते हैं।

Senses के objects हैं।

दिखने वाली चीज़ें। सुनने वाली चीज़ें।

ये flowers हैं।

Fruit (फल) = Suffering (दुःख)

पेड़ पर फूलों के बाद फल आता है।

Bondage के पेड़ का फल क्या होता है?

Suffering। दुःख।

Birth, death, disease, old age… सब।

Bird (पक्षी) = Individual (जीव)

अब एक bird है जो इस पेड़ पर बैठा है।

और fruit खा रहा है।

यह bird = आप (individual jiva)।

आप इस पेड़ पर बैठे हैं।

और suffering का fruit खा रहे हो।

और बार-बार उसी tree पर वापस आते हो।

क्योंकि पेड़ को उखाड़ा ही नहीं गया।

राज का पेड़

राज को एक day अचानक realize होता है।

“अरे, मैं तो एक पेड़ के ऊपर बैठा हूँ।”

“और मैं बार-बार suffering का fruit खा रहा हूँ।”

“क्यों?”

फिर वह देखता है।

Seed = “मैं body हूँ” (अज्ञान)।

Sprout = अपने आप को body के साथ identify करना।

Leaves = सब के लिए attachment।

Water = continuously कर्म करते जाना।

Result = बार-बार suffering।

अब राज को समझ आता है।

“अगर मैं पेड़ को uproot नहीं करूँ… तो बार-बार same suffering होगी।”

प्रिया का Choice

प्रिया को भी same पेड़ दिख रहा है।

लेकिन वह सोचती है।

“अगर मैं पेड़ से उतर जाऊँ… तो क्या होगा?”

“Fruit खाना बंद हो जाएगा।”

“लेकिन पेड़ तो अभी भी वहाँ रहेगा।”

तब उसे एक बहुत बड़ी बात समझ आ जाती है।

“अगर मैं अपने आप को bird से अलग कर दूँ… तो?”

“अगर मैं realize कर दूँ कि ‘मैं bird नहीं हूँ… मैं consciousness हूँ’।.”

“तो?”

तब पेड़ disappear हो जाता है।

नहीं कि physical पेड़ disappear होता है।

लेकिन मेरे लिए।

Sanjay का Observation

संजय ने पेड़ को ध्यान से observe किया।

और उसे पता चल गया।

पेड़ की हर चीज़ connected है।

Seed से sprout।

Sprout से leaves।

Leaves की growth के लिए water (karma)।

सब कुछ एक cycle में है।

“लेकिन एक बात है।”

“अगर seed ही नहीं होता… तो?”

“अगर अज्ञान ही नहीं होता… तो पूरा पेड़ ही नहीं होता।”

“तो असली solution है seed को नष्ट करना।”

“अज्ञान को नष्ट करना।”

अब समझते हैं

Bondage का पूरा structure:

IGNORANCE (अज्ञान) = SEED ↓
BODY-SELF IDENTIFICATION = SPROUT ↓
ATTACHMENT = LEAVES ↓
ACTION (KARMA) = WATER ↓
BODY → PRANA → SENSES → OBJECTS = TRUNK, BRANCHES, SUB-BRANCHES, FLOWERS ↓
SUFFERING = FRUIT ↓
INDIVIDUAL (JIVA) = BIRD eating the fruit ↓
Cycle repeats… Birth → Death → Birth

सबसे महत्वपूर्ण

यह पूरा पेड़ ignorance पर आधारित है।

Ignorance अगर नहीं तो पेड़ नहीं।

लेकिन Ignorance है।

और यह Ignorance “natural, beginningless, और endless” है।

कभी नहीं पता चला कि कब से है।

और अगर knowledge न आए… तो कभी खत्म नहीं होगा।

कैसे Uproot करते हो

पहला तरीका: Stem को cut करो।

पेड़ के stem (body) को खत्म करने की कोशिश करो।

लेकिन?

फिर से grow होगा। फिर से दूसरा body में आएगा।

दूसरा तरीका: Seed को destroy करो।

अज्ञान को destroy करो।

“अरे, मैं body नहीं हूँ।”

“मैं consciousness हूँ।”

यह knowledge है।

और यह knowledge अगर आ गया…

तो पूरा पेड़ root से उखड़ जाता है।

Knowledge का Power

Knowledge को आता ही क्या है?

बस एक बात:

“मैं consciousness हूँ।”

और यह one knowledge पूरे bondage को destroy कर देता है।

क्योंकि bondage का पूरा आधार है ignorance।

गहरी बात

पेड़ असल में “natural” है।

यानी यह automatic है।

जब तक आप consciousness को नहीं समझते… पेड़ automatically grow होगा।

और फल (suffering) automatically आएगा।

लेकिन पेड़ “beginningless” है।

आपको पता नहीं कब शुरू हुआ।

कितने जन्मों से चल रहा है।

और पेड़ “endless” है।

अगर seed (ignorance) को destroy न किया जाए… तो कभी खत्म नहीं होगा।

आज का सवाल

अपने आप से पूछो।

“मैं इस पेड़ पर bird की तरह बैठा हूँ?”

“क्या मैं बार-बार suffering का fruit खा रहा हूँ?”

“क्या मैं अपने आप को ignorance में बांधे रखा हूँ?”

आखिरी बात

संसार का पेड़ बहुत real लगता है।

लेकिन असल में?

यह सब ignorance का creation है।

Seed (ignorance) को destroy कर दो।

“अरे, मैं body नहीं हूँ। मैं consciousness हूँ।”

और देखो कैसे पूरा पेड़ disappear हो जाता है।

Bird अब सो गया?

नहीं।

Bird तो अब उड़ गया।

Freedom।

Moksha।

यह था सचेतन।

नमस्कार। 🙏

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🙏 संसार का पेड़ तब तक grow करता रहेगा, जब तक बीज (अज्ञान) को destroy नहीं किया जाता।

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